Friday , 14 December 2018
सत्संग रूपी अमृत के रसपान से जीवन बनता है धन्य : मोरारी बापू

सत्संग रूपी अमृत के रसपान से जीवन बनता है धन्य : मोरारी बापू

जोधपुर, 29 सितम्बर (उदयपुर किरण). राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने कहा है कि सत्संग अमृत समान है. जो जीव समय रहते सत्संग रूपी अमृत का पान कर लेते हैं,उनका जीवन धन्य हो जाता है. समुन्द्र मंथन में निकला अमृत राक्षकों के पास बारह वर्ष तक रहा मगर वे उसका पान नही कर पाए. कारण यह था कि वे प्राय:व्यसनों में ही डूबे रहते. भगवान ने मोहनी अवतार लेकर वह अमृत देवताओं को पिला दिया, तब राक्षकों को अपनी भूल का अहसास हुआ. इसी प्रकार विभिन्न व्यसनों में डूब कर व्यक्ति अपना पूरा जीवन गंवा देते है, मगर सत्संग रूपी अमृत का रसपान नहीं कर पाते. समय निकलने के बाद पश्चाताप के अलावा कुछ हाथ नही लगता.

राष्ट्रीय संत मोरारी बापू पुष्कर के साधुसंतों के सानिध्य में बीजेएस कालोनी स्थित शिव मन्दिर में आयोजित पाक्षिक श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शनिवार को भक्तों को संबोधित कर रहे थे. बापू ने आज गजेन्द्र मोक्ष, हरि अवतार, समुन्द्र मंथन, कच्छब अवतार, धनवन्तरी अवतार, मोहनी अवतार,बावन अवतार तथा मृत्स अवतार के प्रसंगो की व्याख्या की. मानसिंह मेड़तिया ने बताया कि रविवार को श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. कथा के पांचवे दिन आज भी भक्तों की भारी भीड़ रही.

Source : http://udaipurkiran.in/hindi/

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