Monday , 10 December 2018
बृहस्पति 12 साल बाद 11 अक्टूबर को मंगल राशि में करेंगे प्रवेश, रुके कार्यों में आएगी गति

बृहस्पति 12 साल बाद 11 अक्टूबर को मंगल राशि में करेंगे प्रवेश, रुके कार्यों में आएगी गति

देव गुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को शाम 19:21 बजे तुला राशि को छोड़कर ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में मंगल प्रवेश करेंगे. ऐसे में यह माना जा रहा है कि देवगुरु का यह राशि परिवर्तन कई जातकों के लिए उन्नति के द्वार खोलेगा. ज्योतिषियों के अनुसार इस परिवर्तन के बाद अब अधिकांश राशि के जातकों के लिए यह समय प्रगति का रहेगा. वहीं लोगों को राहत का भी अनुभव होगा.

इसके अलावा रुके कार्यों में गति आएगी तथा लाभ व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. ज्योतिष की मानें तो गुरु गोचर वृश्चिक राशि में 11 अक्टूबर से 29 मार्च 2019 तक भ्रमण करते रहेंगे और 29 मार्च को धनु राशि में प्रवेश करेंगे. गुरु 11 अप्रैल को वक्री हो जाएंगे आैर 23 अप्रैल को वक्री होकर गुरु वृश्चिक में प्रवेश करेंगे. इसी राशि में वे 5 नवंबर 2019 तक भ्रमण करते रहेंगे.

नवग्रहों मेें बृहस्पति को सभी नमन करते हैं

नवग्रहों में देव गुरु बृहस्पति को सभी नमन करते हैं, गुरुओं के गुरु का हमारी शिक्षा, विवाह, संतान, भवन, वाहन, वाणी, सत्ता व नौकरी पर विशेष प्रभाव रहता है. गुरु की अशुभ स्थिति में व्यापार में हानि विलंब से विवाह, शुगर, थॉयराइड व किडनी खराब होने की संभावना होती है.

गुरु के काल खंड में वक्रीय तथा मार्गीय गति के कारण व्यापार-व्यवसाय की गति बढ़ेगी

ज्योतिषियों के अनुसार गुरु के कालखंड में वक्रीय तथा मार्गीय गति के कारण व्यापार-व्यावसाय की गति बढ़ेगी और बाजार में बृहस्पति का प्रभाव नजर आएगा. सोने, तांबे में तेजी का अनुमान है. गुरु परिभ्रमण के दौरान लाल वस्तुओं के कारोबार में तेजी रहेगी. घी, तेल, सरसों व सोयाबीन में तेजी-मंदी का वातावरण रहेगा. राजनीति के दृष्टिकोण से परिवर्तन के योग बनेंगे और राजनीति अस्थिरता, सत्ता परिवर्तन कर सकती है, मंगल के घर में गुरु का गोचर प्रॉपर्टी, रियल स्टेट में कुछ जगह तेजी तो कहीं भारी मंदी रहेगी.

कैसे करें गुरु को प्रसन्न

जातकों को गुरु की प्रसन्नता के लिए बृहस्पति स्त्रोत का पाठ करना चाहिए. बृहस्पति के वैदिक मंत्रों का जप तथा बृहस्पति या शिव मंदिर में प्रत्येक गुरुवार को गुड, चना, दाल, हल्दी गांठ, पीले पुष्प अर्पित करना चाहिए. वहीं इस दौरान माता-पिता व गुरु की सेवा करने के साथ दान-पुण्य करना चाहिए. इसमें गरीबों को खाना व गायों को हरा चारा खिलाना चाहिए.

Source : http://udaipurkiran.in/hindi/

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