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गरबा आराधना है मां की, कोई डांस प्रोग्राम नहीं

गरबा आराधना है मां की, कोई डांस प्रोग्राम नहीं

उदयपुर, 07 अक्टूबर (उदयपुर किरण). नवरात्रि नवदुर्गा मातृशक्ति देवियों की आराधना का पर्व है. यह न तो कोई डांस प्रोग्राम है, न ही कोई पिकनिक पार्टी. इस मातृशक्ति की आराधना के पर्व में जो नई-नई बातें प्रवेश करती जा रही हैं, उनमें से कई परम्पराओं के अनुकूल नहीं हैं. हमें यह संकल्प व्यक्त करना होगा कि नवरात्रि का यह पर्व शुद्ध और सात्विक रूप से माता की आराधना का पर्व ही बना रहे, नौ दिनों में होने वाले विविध अनुष्ठानों में तन और मन की स्वच्छता जरूरी है.

यह बात फतह स्कूल वाले हनुमान मंदिर के महंत सुरेश गिरि महाराज ने रविवार सुबह युवा समाजसेवियों की ओर से आयोजित नवरात्रि सम्मेलन में कही. उन्होंने आह्वान किया कि परम्पराओं में प्रवेश करने वाले प्रदूषण के लिए भी एक स्वच्छता अभियान की जरूरत है जिसकी जिम्मेदारी आज की युवा पीढ़ी को उठानी होगी. समारोह में विशिष्ट अतिथि युवा समाज सेवी प्रवीण रतलिया ने कहा कि भारतीय हिन्दू संस्कृति का संरक्षण और संवर्द्धन युवा पीढ़ी ही कर सकती है और यह उसकी जिम्मेदारी भी है. यह खुशी की बात है कि हमारे हर पर्व पर दिनोंदिन उल्लास बढ़ रहा है, लेकिन इस उल्लास में कुछ दृश्य ऐसे भी सामने आते हैं जो कहीं न कहीं हमारी परम्पराओं के अनुकूल नहीं हैं.

पर्वों पर हमारे पहनावे, हमारे आचार-व्यवहार आदि भी पर्व के अनुरूप हों, मां के दरबार में हम नंगे पैर हाजिरी लगाएं, गरबा स्थल भी एक पूजा स्थल है, उसकी स्वच्छता का ध्यान रखें, इन सभी बातों का संकल्प लेना होगा. रतलिया ने उपस्थित 1200 युवाओं को भगवा गमछे पहनाकर संकल्प दिलवाया कि नवरात्रि के नौ ही दिन वे पूर्ण अनुशासन व तन-मन से शुद्ध-स्वच्छ रहकर माता की आराधना करेंगे, गरबा स्थलों पर अवांछित गतिविधियों सहित अवांछित तत्वों का भी प्रवेश नहीं होने देंगे. यह गमछा वह हर वक्त अपने गले में रखेंगे ताकि वह उन्हें उनका संकल्प याद दिलाता रहे. कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवी युवतियों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं भी पारम्परिक परिधानों में गरबा आयोजनों में जाएंगी और अपने साथ परिचितों, सहेलियों और कार्यक्रमों में आने वाली अन्य महिलाओं से भी पारम्परिक राजस्थानी परिधानों में आने का आग्रह करेंगी. इस कार्यक्रम में शहरभर में विभिन्न स्थानों पर होने वाले गरबा आयोजनों के कार्यकर्ता मौजूद थे.

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