Wednesday , 12 December 2018
संकट के समय मित्र की मदद जरूर करनी चाहिए- मोरारी बापू

संकट के समय मित्र की मदद जरूर करनी चाहिए- मोरारी बापू

जोधपुर, 07 अक्टूबर (उदयपुर किरण). राष्ट्रीय संत दिव्य मोरारी बापू ने कहा है कि संकट के समय मित्र की मदद जरूर करनी चाहिए. मित्रता में भेद नही करना चाहिए. गरीब सुदामा की मदद करके भगवान श्रीकृष्ण ने समाज को यही शिक्षा दी है. शास्त्र कहते हैं कि जो सुख में साथ निभाए और दुख में मुंह छिपाता फिरे वह सच्चा मित्र कभी नही हो सकता.

पुष्कर के साधुसंतों के सानिध्य में बीजेएस कालोनी स्थित शिव मन्दिर में चल रही पाक्षिक श्रीमद्भागवत कथा के तेरहवें दिन रविवार को राष्ट्रीय संत दिव्य मोरारी बापू सुदामा चरित्र के प्रसंग की व्याख्या कर रहे थे. उन्होने कहा कि मित्र, गुरू,वैद्य, कन्या की ससुराल,बीमार तथा साधुसंतों के जावें तो पास खाली हाथ कभी नही जाना चाहिए. इनसे मिलने जाना हो तो कुछ ना कुछ भेंट साथ में जरूर ले जाना चाहिए. उन्होने कहा कि सुदामा जब भगवान से मिलने द्वारिका रवाना हुए तो घर में कुछ नही था. थोड़े से चावल मिले तो वही साथ लेकर मित्र से मिलने निकल पड़े.

संत दिव्य मोरारी बापू ने आज कहा कि भगवान की शरण बिना जीव का कल्याण नही है. कोई भी कार्य करें, भगवान की शरणागत होकर करें. सफलता जरूर मिलेगी. उन्होने कहा कि व्यक्ति को कभी भी खुद को भगवान नही समझना चाहिए. संसार में जब जब किसी ने भगवान बनने का प्रयास किया है, उसका सर्वनाश हुआ है. संतान अपने माता- पिता को भगवान समझती है तो उसमें कोई हर्ज नही है. अगर मां- बाप खुद ही अपने को भगवान मान बैठेंगे तो उनका बुरा हाल होगा. अगर कोई शिष्य अपने गुरू को भगवान मान कर पूजता है तो कोई बुराई नही है. अगर किसी गुरू खुद को भगवान मानने और पूजवान का कार्य किया तो उसके बुरे हाल ही हुए हैं.

आज कथा में बीजेएस विकास समिति, शिव मन्दिर के सचिव जसवंतसिंह भाटी, पूर्व अध्यक्ष भवानीसिंह डांवरा,कोषाध्यक्ष विजेन्द्रसिंह नरूका,चामुड़सिंह मेड़तिया, प्रहलादसिंह मेड़तिया, प्रहलादसिंह शेख्रावत, राजसिंह, यश राजपुरोहित सहित उपस्थित थे. व्यवस्थापक संत घनश्यामदास महाराज ने बताया कि संत दिव्य मोरारी बापू 9 अक्टूबर तक बीजेएस कालोनी स्थित शिव मन्दिर में पाक्षिक श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करेंगे.

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