Monday , 22 October 2018

ख्वाजा की मजार पर चढ़े फूलों से खाद बनाने पर होने लगी सियासत

अजमेर, 08 अक्टूबर (हि.स..). सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की मजार पर पेश फूलों से खाद बनाने पर खुद्दाम ए ख्वाजा ने कड़ा ऐतराज दर्ज कराया है. दरगाह परिसर में बीती रात खादिमों की एक बड़ी बैठक हुई. इस बैठक में खादिमों की संसथा अंजुमन सैय्यद जादगान के सदस्य मुनव्वर चिश्ती, शमीम नियाजी, शेखजादा जुल्फिकार चिश्ती, सैय्यद जावेद चिश्ती, हसन हशमी, मुनव्वर अली, पीर नफीस मियां चिश्ती, अब्दुल नईम खान आदि ने कहा कि ख्वाजा साहब की मजार पर पेश फूलों से जायरीन की धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती है. ऐसे में इन फूलों से खाद बनाना उचित नहीं है. खादिमों की संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान और शेखजादगाान के पदाधिकारियों ने खादिम समुदाय को विश्वास में लिए बिना ही उस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए जो दरगाह कमेटी और वेदांता समूह के बीच हुआ था. अब वेदांता समूह ही फूलों की खाद बनाने का कार्य कर रहा है.

बैठक में 100 से भी ज्यादा खादिम और अकीदतमंद उपस्थित थे. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आठ अक्टूबर से मजार शरीफ पर पेश फूल खाद बनाने के लिए नहीं दिए जाएंगे. खादिम समुदाय अपने स्तर पर फूलों का निस्तारण करेगा. इसके लिए खादिम जावेद चिश्ती ने प्रस्ताव रखा कि उनकी सराधना स्थित जमीन पर फूलों को भूमिगत किया जा सकता है. खादिमों के ऐतराज से एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. उल्लेखनीय है कि वेदांता समूह ने अपने सामाजिक सरोकारों के अंतर्गत कायड़ विश्राम स्थली पर फूलों से खाद बनाने की मशीन लगाई है. केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री मुख्तार अब्बास नकबी की उपस्थिति में ही पिछले दिनों दरगाह कमेटी और वेदांता समूह के बीच एमओयू हुआ था.

खाद शब्द पर एतराज-अंजुमन सचिवः

खादिमों की संस्था अंजुमन सैय्यदजादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगारा ने कहा कि कुछ खादिमों के विरोध की जानकारी मिली है. ऐसा प्रतीत होता है कि खादिमों को खाद शब्द पर ऐतराज है. अंजुमन ने विस्तृत अध्ययन के बाद ही फूलों से खाद बनाने की अनुमति दी थी. अब यही कुछ खादिमों को ऐतराज है तो उससे बात कर समाधान निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि पूर्व में भी दरगाह कमेटी बावड़ी और कुओं में फूलों को डालती थी, तब खादिमों ने ही बेअदबी की शिकायत की. इसी को देखते हुए खाद बनाने पर सहमति बनी थी.

संवाद से निकालेंगे हल-नाजिमः

दरगाह कमेटी के नाजिम आईबी पीरजादा ने ताजा विवाद पर कहा कि खाद बनाने का निर्णय खादिमों की दोनों संस्थाओं की सहमति से हुआ था. दरगाह कमेटी को तो खादिम समुदाय फूल देता है, उसे कायड़ विश्राम स्थली तक पहुंचाने का काम करती है. यदि अब फूल नहीं दिए जाएंगे तो दरगाह कमेटी कुछ नहीं कर सकती. इस संबंध में नाराज खादिमों से संवाद पर समाधान निकाला जाएगा.

अगरबत्ती और गुलाबजल बनाने पर बन सकती है बात—

पूर्व में भी अगरबत्ती और गुलाबजल बनाने पर नाजिम अहमद रजा साहब के समय पर प्रस्ताव लिया था. तब बना हुआ कारखाना बंद करना पड़ा था. पूर्व में दरगाह के पीछे ही अंदर कोट में गुलाब को खड्डे में डाला जाता था तो भी बदबू को लेकर क्षेत्र के लोगों का ऐतराज था.

आखिर हो रही है सियासत—

जानकारी के अनुसार खादिम समुदाय की अंजुमनों के अगले दो चार माह में चुनाव होने वाले हैं. इसे लेकर खुद्दाम ए ख्वाजा समुदाय में सियासत गरमाई हुई है. जो लोग वर्तमान में पदों पर हैं उनकी मुखालफत होने लगी है जबकि जो लोग चुनाव जीत कर अंजुमन पर कब्जा चाहते हैं वे मौजूदा पदाधिकारियों के निर्णयों पर ऐतराज करने में जुटे है. आखिर समझ नहीं आ रहा कि समाज चाहता क्या है.

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