Monday , 15 October 2018

इंडिया की जीडीपी ग्रोथ चीन से ज्यादा रहेगी: IMF

नई दिल्ली:अंतरराष्ट्रीय मुद्रो कोष (IMF) ने मौजूदा फिस्कल इयर के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा है. हालांकि महंगे क्रूड और ग्लोबल फाइनैंस में कमी के चलते अगले साल के लिए इसकी जीडीपी ग्रोथ में थोड़ी कमी की है. उसका यह भी कहना है कि इंडिया ग्रोथ के मोर्चे पर चीन से काफी आगे होगा और दुनिया में सबसे तेज ग्रोथ वाली इकॉनमी बना रहेगा.
आईएमएफ ने अपने हालिया वर्ल्ड इकॉनमिक आउटलुक में लिखा है कि फिस्कल इयर 2019 में इंडिया की ग्रोथ 7.3% जबकि फिस्कल इयर 2020 में 7.4% रह सकती है. हालांकि उसने जनवरी के फोरकास्ट में 7.5% ग्रोथ का अनुमान दिया था. इसने चीन की जीडीपी ग्रोथ 2018 में 6.6% और 2019 में 6.2% रहने का अनुमान दिया है. इंडियन इकॉनमी का ग्रोथ रेट फिस्कल इयर 2018 में 6.7% रहा था.
IMF ने कहा, ‘इंडियन इकॉनमी की ग्रोथ में तेजी बताती है कि करंसी एक्सचेंज को लेकर उठाए गए कदमों और जीएसटी के चलते बने ट्रांजिटरी शॉक से उबर रही है. इसमें उसे इनवेस्टमेंट में आ रही मजबूती और ठोस प्राइवेट कंजम्पशन से मदद मिल रही है.’ कैपिटल एक्सपेंडिचर ज्यादा होने के बावजूद फिस्कल इयर 2019 में अप्रैल के मुकाबले इनवेस्टमेंट कम रहने का अनुमान दिया गया है.
मीडियम टर्म में इंडिया की ग्रोथ 7.75% पर ठोस बने रहने का अनुमान दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक इसे बुनियादी आर्थिक सुधारों और इकॉनमी में युवाओं की बड़ी आबादी के योगदान का फायदा मिलेगा. इकनॉमिक रिकवरी को डोमेस्टिक डिमांड में मजबूती का सपोर्ट मिल रहा है.
आरबीआई ने शुक्रवार के मौद्रिक नीति समीक्षा में फिस्कल इयर 2019 के ग्रोथ फोरकास्ट को 7.4% पर जस का तस रखा था. आईएमएफ का अनुमान है कि इंडिया का करंट अकाउंट डेफिसिट मौजूदा फिस्कल इयर में जीडीपी के 3% पर आ सकता है. हालांकि 2020 में यह 2.5% पर पहुंच जाएगा.
फिस्कल इयर 2019 में डिमांड के साथ ही फ्यूल प्राइस में हो रही बढ़ोतरी के चलते इन्फ्लेशन 4.7% रहने का अनुमान दिया गया है जो फिस्कल इयर 2018 में 3.6% थी. कोर इन्फ्लेशन का आंकड़ा बढ़कर लगभग 6% तक पहुंच गया है जिसके लिए क्षमता और उत्पादन के बीच फर्क घटने, फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी का बोझ कंज्यूमर पर डाले जाने और रुपये में कमजोरी जिम्मेदार है.
आईएमएफ ने महंगाई में बढ़ोतरी के आसार को देखते हुए पॉलिसी रेट में 25-50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी होने का अनुमान दिया है. आरबीआई ने पिछले हफ्ते मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में रीपो रेट को 6.5% पर जस का तस रखा था. 100 बेसिस पॉइंट एक पर्सेंट के बराबर होता है.
डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट पर आईएमएफ का कहना है कि फॉरेक्स मार्केट में सरकार का दखल सीमित रह सकता है. वह अपने रिजर्व बफर को सुरक्षित रखते हुए बाजार में व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करेगी. 2018 की शुरुआत से अब तक रुपया लगभग 13% टूट चुका है.

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