Tuesday , 11 December 2018
आम्रपाली बिल्डर कम्पनी मालिकान फाेरेंसिक जांच के लिए क्यों नहीं दे रहे कम्पनियों के दस्तावेज

आम्रपाली बिल्डर कम्पनी मालिकान फाेरेंसिक जांच के लिए क्यों नहीं दे रहे कम्पनियों के दस्तावेज

फोरेंसिक जांच होते ही उनके और भी भ्रष्टाचार के उजागर हो जायेंगे कारनामे सर्वोच्च न्यायालय ने इसके तीन निदेशकों को भेजा पुलिस हिरासत में दस्तावेज नहीं दिये तो हो सकता है जेल,जमीन जायदाद की नीलामी

नई दिल्ली, 09अक्टूबर (उदयपुर किरण). सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद आम्रपाली बिल्डर कम्पनी समूह के शातिर प्रबंध निदेशक अनिल कुमार शर्मा,अजय कुमार व शिव प्रिय ( ये तीनों ही बिहार के हैं और भूमिहार हैं) आम्रपाली व उसकी लगभग 50 सहोदर कम्पनियों के रिकार्ड / दस्तावेज फारेंसिक जांच के लिए क्यों नहीं दे रहे हैं. ये क्यों हीला हवाली कर रहे हैं, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय की जस्टिस यूयू ललित व जस्टिस अरुण मिश्रा की खंडपीठ ने आम्रपाली बिल्डर कम्पनी समूह के वकील भाटिया से पूछा कि फारेंसिक ऑडिट से संबंधित दस्तावेजों को अब तक ऑडिटरों के पास जमा क्यों नहीं कराया गया? न्यायालय ने आम्रपाली समूह के मालिकानों को सख्त चेतावनी दी कि लुका छिपी का खेल न खेलें और पुलिस बुलाकर आम्रपाली समूह के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार शर्मा, अजय कुमार व शिव प्रिया को पुलिस हिरासत में भेज दिया. आदेश दिया कि इन्हे तब तक हिरासत में रखा जाये जब तक फारेंसिक ऑडिट के लिए आडिटरों को सभी दस्तावेज नहीं देते. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि दस्तावेज देने तक तीनों लोग पुलिस की हिरासत में रहेंगे.

सर्वोच्च न्यायालय ने इसके पहले ऋण वसूली ट्रिब्यूनल को आम्रपाली की 16 संपत्तियों की नीलामी/ बिक्री करने का आदेश दिया था. ताकि उससे मिलने वाली रकम को अधूरे पड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगाया जा सके और पता चल सके कि कितनी रकम आई और बाकी रकम कहां से कैसे जुटाई जायेगी. कहा जा रहा है कि आम्रपाली की सम्पत्तियों को बेचने से लगभग 1400 करोड़ रुपये के लगभग मिलने की संभावना है लेकिन मुश्किल यह है कि इनमें से ज्यादातर सम्पत्तियों को इसने गिरवी रख दिया है या अवैध रूप से बेच दिया है. अधूरी परियोजनाओं के पार्क व दो बिल्डिंग के बीच की बच्चों के खेलने की जमीन तक को बेच दिया है. जो कि बिल्डिंग वायलाज का सरासर उल्लंघन है. सूत्रों के अनुसार यही सब भ्रष्टाचार करके, ग्राहकों के हजारों करोड़ रुपये विदेशों में हवाला के मार्फत भेजकर या दूसरी कम्पनियों में लगाकर, लगभग 22 हजार ग्राहकों को इसने दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया है.

ग्राहकों को किसी भी तरह से उनके मकान दिलाने के लिए ही सर्वोच्च न्यायालय ने आम्रपाली के निदेशकों को सभी संबंधित दस्तावेजों को डीआरटी के यहां जमा कराने को कहा था. ताकि डीआरटी दस्तावेज देखकर पता लगाया जा सके कि कौन सी सम्पत्तियां साफ सुथरी, बिना झमेले वाली हैं, जिनकी नीलामी की जा सके. न्यायालय ने इसीलिए फारेंसिक ऑडिटर को भी निर्देश दिया था कि वह दस्तावेज देखकर 60 दिन के भीतर रिपोर्ट दे कि आम्रपाली समूह के निदेशकों ने ग्राहकों से लिए रकम में से लगभग 2700 करोड़ रुपये का गबन कैसे किया है, कहां ले गये. सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आम्रपाली बिल्डर की आधी अधूरी पड़ी तमाम परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पहल की एनबीसीसी से 60 दिन में ऐसी परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट देने, और बिल्डर के पास जो जमीन व खाली फ्लैट हैं, उनको बेचकर कितनी परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है, इन सबकी विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है.

सूत्रों का कहना है कि आम्रपाली बिल्डर समूह के मालिकान अपने कम्पनी समूह की लगभग 50 कम्पनियों का दस्तावेज देने में इसलिए हीलाहवाली कर रहे हैं, क्योंकि यह देने पर इनके और भी बहुत से कारनामों व भ्रष्टाचार का खुलासा हो जायेगा. इस तरह 22 हजार ग्राहकों को दर-दर ठोकरे खाने के लिए मजबूर कर देने वाले आम्रपाली बिल्डर कम्पनी के मालिक अनिल शर्मा, अजय कुमार और शिव प्रिया, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद नोएडा सेक्टर-39 पुलिस की हिरासत में सुख से हैं. ये तब तक रहेंगे जब तक अपनी सभी कम्पनियों के दस्तावेज फारेंसिक जांच के लिए नहीं देते. जब दे देंगे तब बाहर आ जायेंगे. सूत्रों का कहना है कि दस्तावेज बनाने में ये सभी कई सप्ताह से लगे हुए थे लेकिन जब भ्रष्टाचार पर ही महल खड़ा किये हैं तो दस्तावेज कितना बनायेंगे. अपने सजातीय नेताओं, सांसदों, मंत्रियों, अफसरों की मदद से कितना दिन बचेंगे. अभी हिरासत में हैं, इसके बाद जेल जायेंगे. इसके बाद इनकी व इनके परिजनों की सम्पत्तियों की भी नीलामी हो सकती है. पहले ये लोग समझते थे कि सत्ता व पैसे के जोर से बड़ा से बड़ा भ्रष्टाचार करके आम जनता को लूट कर बचा जा सकता है.

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