Saturday , 20 October 2018

आम्रपाली के 3 निदेशकों को गिरफ्तार करने का सुप्रीम आदेश

नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (उदयपुर किरण). सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम्रपाली समूह के तीन निदेशकों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है. जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आम्रपाली समूह के तीन निदेशकों अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. कोर्ट ने आम्रपाली के निदेशकों के वकील गौरव भाटिया से कहा कि जब तक वे फोरेंसिक ऑडिटर को सारे दस्तावेज नहीं देते तब तक उन्हें पुलिस हिरासत में रहना होगा.आम्रपाली के निदेशकों को पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को अवमानना नोटिस जारी किया. कोर्ट ने अपने अवमानना नोटिस में पूछा कि क्यों न कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना के चलते उनपर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाया जाए.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हमने फोरेंसिक ऑडिटर से रिपोर्ट मांगी थी लेकिन वो रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है. हमारे आदेशों का पालन नहीं हुआ है. उसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा ने कोर्ट रूम में मौजूद तीनों निदेशकों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर आप इज्जत से जीना चाहते हैं तो सारे दस्तावेज कोर्ट में दाखिल करें. पिछले 12 सितम्बर को कोर्ट ने आम्रपाली सममूह पर सख्ती बरतते हुए कहा था कि हम आम्रपाली की सारी संपत्ति बिकवा सकते हैं, आम्रपाली बिल्डर की नीयत ठीक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली ट्रिब्यूनल (डीआरटी) को आम्रपाली की कुछ सम्पत्तियों को नीलाम करने का आदेश दिया था. इन सम्पत्तियों की बिक्री से करीब 1600 करोड़ की उगाही होगी. कोर्ट ने आम्रपाली के डायरेक्टर को 25 सितम्बर को डीआरटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आम्रपाली सभी संबंधित दस्तावेज डीआरटी को सौपे.

जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आम्रपाली को निर्देश दिया था कि वो 25 लाख रुपये की रकम से बैंक में खाता खोले. सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि कैसे इस रकम का इस्तेमाल अधूरे प्रोजेक्ट के निर्माण में हो. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि 2015 के बाद से अब तक आम्रपाली की 46 कम्पनियों के सभी खातों की डिटेल क्यों नहीं सौंपी गई. कोर्ट ने 10 दिनों के अंदर सभी बैलेंस शीट सौंपने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिटर से कहा 60 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपे कि कितनी रकम का कैसे गबन हुआ है.
पिछले छह सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की 16 संपत्तियां नीलाम करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने आदेश दिया था कि ये संपत्तियां नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) की निगरानी में नीलाम होंगी. एनबीसीसी को आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने हैं.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि बाद में निदेशकों की संपत्ति भी नीलाम होगी. कोर्ट ने आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा को अपनी संपत्तियों का ब्यौरा देने का आदेश दिया था. कोर्ट ने अनिल शर्मा से पूछा था कि 2014 में चुनाव आयोग में दाखिल किए गए हलफनामे में 867 करोड़ की बताई गई सम्पत्ति 2018 में 67 करोड़ कैसे हो गई? कोर्ट से जानकारी क्यों छिपाई. कोर्ट ने आम्रपाली की 46 कंपनियों के फॉरेंसिक ऑडिट का भी आदेश दिया.

पिछले चार सितम्बर को कोर्ट ने कहा था कि अब तक ऐसा रियल एस्टेट फ्रॉड नहीं देखा है. कोर्ट ने कंपनी और उसके निदेशकों के बैंक खातों का फॉरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को स्वतंत्र ऑडिटर के नाम सुझाने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर 100 लोगों को जेल भेजना पड़ा, तो ये भी किया जाएगा. सुनवाई के दौरान नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) ने कोर्ट को बताया था कि आम्रपाली के सभी प्रोजेक्ट पूरे करने में करीब 8500 करोड़ रुपये लगेंगे. आम्रपाली की संपत्तियों को बेच कर इन पैसों का बंदोबस्त कर पाना मुश्किल है. बैंक से फंड लेने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन उसमें भी दिक्कत आएगी.
पिछले 21 अगस्त को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) से पूछा था कि प्रोजेक्ट कैसे और कब तक पूरे होंगे? कोर्ट ने आम्रपाली के निदेशकों से अपनी संपत्ति का ब्यौरा जमा करवाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा था कि हम संपत्तियों को बेचने का आदेश दे सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रोजेक्ट में बिजली नहीं कटेगी. आम्रपाली खुद तीन करोड़ रुपये का बकाया चुकाए.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आम्रपाली के वकील से पूछा था कि प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 5112 करोड़ के लिए आपके पास क्या व्यवस्था है. बायर्स के 2700 करोड़ रुपये जो आपने डाइवर्ट किये थे, पहले वो लाइए. पिछले 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के प्रमोटर्स को चेतावनी दी थी कि वे कोर्ट से ज्यादा स्मार्ट न बनें अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. कोर्ट ने आम्रपाली समूह के प्रमोटर्स और निदेशकों से कहा था कि हम आपको बेघर कर देंगे और आपका एक एक इंच बेंच देगें अगर आप अपने अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पांच हजार करोड़ रुपए का इंतजाम नहीं करेंगे.
पिछले दो अगस्त को लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) को आम्रपाली समूह के सभी अधूरे प्रोजेक्ट को टेकओवर करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने एनबीसीसी से एक महीने के भीतर इसके लिए समग्र योजना बनाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने एनबीसीसी से पूछा कि इस काम को कितने दिन में पूरा किया जा सकता है.
इस मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे. कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए पूछा था कि आपको एनबीसीसी कोआमंत्रित करने के लिए किसने अधिकृत किया? मीटिंग में निवेशकों का प्रतिनिधित्व किसने किया? क्या आपको सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश की जानकारी नही? क्या आम्रपाली से आपने रिकॉर्ड तलब किया.
कोर्ट ने एनबीसीसी द्वारा आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने संबंधी योजना की जानकारी मीडिया को विज्ञापन के जरिए देने की आलोचना की थी. कोर्ट ने कहा था कि जब मामला कोर्ट में लंबित है तो आपने ये विज्ञापन कैसे दे दिया. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के वकील से पूछा कि हम आप पर विश्वास कैसे करें ? आप कोर्ट का आदेश नहीं मान रहे हैं. न बिजली, न पानी, न लिफ्ट. आपको पता नहीं कि आप किस मुसीबत में हैं.
पिछले एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की सभी कंपनियों और निदेशकों के खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने सभी कम्पनियों और निदेशकों की सम्पति भी जब्त करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि लगता है कि कोर्ट के साथ गंभीर फ्रॉड खेला जा रहा है. फिलहाल हर कोई हमारे शक के दायरे में है.
कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) के चेयरमैन और केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय के सचिव को भी तलब किया था. कोर्ट ने आम्रपाली के प्रोजेक्ट टेकओवर करने को लेकर एनबीसीसी के साथ हुई बैठक को भी गुमराह करने की कोशिश करार दिया. कोर्ट ने पूछा था कि जब हम सुनवाई कर रहे हैं तो समानांतर कार्रवाई क्यों शुरू की गई.

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