Monday , 15 October 2018

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के आंकड़ों से भारत का जीडीपी ग्रोथ मैच नहीं हो रहा

मुंबई, 10 अक्टूबर (उदयपुर किरण). अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की रिपोर्ट के् साथ भारत सरकार की जीडीपी ग्रोथ मैच नहीं खा रहा है. आईएमएफ ने जहां वित्त वर्ष 2020 के लिए भारत का जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटाकर 7.4 फीसदी कर दिया है, तो वहीं विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी की है. भारत सरकार की ओऱ से कहा गया है कि अगले दो साल तक भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 8.2 फीसदी तक पहुंच जाएगी और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा. महंगे क्रूड की वजह से आईएमएफ ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटाया है, तो वहीं घेरलू जोखिम और कम अनुकूल बाहरी परिवेश से बृहत-आर्थिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ने का संकेत विश्व बैंक की ओऱ से दिया गया है. आईएमएफ का मानना है कि ज्यादा ब्याज के कारण कर्ज घटाने पर भारत सरकार को ध्यान देना जरूरी हो गया है.

गौरतलब है कि विश्व बैंक ही में जारी की गई अपनी रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि की मजबूती को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे. चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत का अनुमान लगाया है, जबकि अगले दो वर्षों में यह वृद्धि दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत पर पहुंचने की बात कही थी. लेकिन विश्व बैंक की इस रिपोर्ट की तुलना में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की रिपोर्ट में भारत की जीडीपी पिछले साल की तुलना में घटकर 7.4 फीसदी रहने की बात कही गई थी. दोनों अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के 8.2 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के दावे की भी खिल्ली उड़ा रही है. पिछले वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही थी.

विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की अस्थायी बाधाओं के प्रभाव से फिलहाल निकल चुकी है. हालांकि, घेरलू जोखिम और कम अनुकूल बाहरी परिवेश से बृहत-आर्थिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ने का संकेत भी दिया है. जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने अपनी रिपोर्ट में विभिन्न देशों को सुधारों को वापस लेने के प्रति आगाह किया है. आईएमएफ ने कहा है कि सुधारों को वापस लेने की प्रक्रिया से वैश्विक वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा को खतरा पैदा हो जाएगा. इसके साथ ही स्थिरता भी संकट में आ जाएगा. आईएमएफ ने सभी देशों से अपील करते हुए कहा है कि सुधार प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय होना चाहिए. सुधार एजेंडा को किसी भी स्थिति में पूरा किया जाना चाहिए.

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