Wednesday , 12 December 2018
आम्रपाली समूह के निदेशकों की रिहाई की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, गुरुवार को कोर्ट में पेशी

आम्रपाली समूह के निदेशकों की रिहाई की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, गुरुवार को कोर्ट में पेशी

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (उदयपुर किरण). सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को आम्रपाली समूह के जिन तीन निदेशकों को पुलिस हिरासत में भेजा गया था, उन्होंने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी रिहाई की मांग की. याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे तब तक उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि तीनों को लॉक अप में न रखा जाए. तीनों को थाने में उचित जगह पर रखा जाए. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वो गिरफ्तार तीनों निदेशकों को 11 अक्टूबर को कोर्ट में पेश करें.

सुनवाई के दौरान इन निदेशकों ने कहा कि जिन दस्तावेजों की तलाश है वो नोएडा के एक, ग्रेटर नोएडा के सात और बिहार के राजगीर और बक्सर के दो दफ्तरों में हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी नौ दफ्तरों को सील करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि इन निदेशकों को ये हलफनामा देना होगा कि दस्तावेज इन नौ दफ्तरों के अलावा दूसरे स्थान पर नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने नौ अक्टूबर को तीनों निदेशकों अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने आम्रपाली के निदेशकों के वकील गौरव भाटिया से कहा था कि जब तक वे फोरेंसिक ऑडिटर को सारे दस्तावेज नहीं देते तब तक उन्हें पुलिस हिरासत में रहना होगा.

आम्रपाली के निदेशकों को पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को अवमानना नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने अपने अवमानना नोटिस में पूछा है कि क्यों न कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना के चलते उनपर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाया जाए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि हमने फोरेंसिक ऑडिटर से रिपोर्ट मांगी थी लेकिन वो रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है. हमारे आदेशों का पालन नहीं हुआ है. उसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा ने कोर्ट रूम में मौजूद तीनों निदेशकों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर आप इज्जत से जीना चाहते हैं तो सारे दस्तावेज कोर्ट में दाखिल करें.

पिछले 12 सितम्बर को कोर्ट ने आम्रपाली समूह पर सख्ती बरतते हुए कहा था कि हम आम्रपाली की सारी संपत्ति बिकवा सकते हैं, आम्रपाली बिल्डर की नीयत ठीक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली ट्रिब्यूनल (डीआरटी) को आम्रपाली की कुछ सम्पतियों को नीलाम करने का आदेश दिया था. इन सम्पतियों की बिक्री से करीब 1600 करोड़ की उगाही होगी. कोर्ट ने आम्रपाली के डायरेक्टर को 25 सितम्बर को डीआरटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आम्रपाली सभी संबंधित दस्तावेज डीआरटी को सौंपे.

जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आम्रपाली को निर्देश दिया था कि वो 25 लाख रुपये की रकम से बैंक में खाता खोले. सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि कैसे इस रकम का इस्तेमाल अधूरे प्रोजेक्ट के निर्माण में हो. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि 2015 के बाद से अब तक आम्रपाली की 46 कम्पनियों के सभी खातों की डिटेल क्यों नहीं सौंपी गई. कोर्ट ने 10 दिनों के अंदर सभी बैलेंस शीट सौंपने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिटर से कहा 60 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपे कि कितनी रकम का कैसे गबन हुआ है.

छह सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की 16 संपत्तियां नीलाम करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने आदेश दिया था कि ये संपत्तियां नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) की निगरानी में नीलाम होंगी. एनबीसीसी को आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने हैं.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि बाद में निदेशकों की संपत्ति भी नीलाम होगी. कोर्ट ने आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा को अपनी संपत्तियों का ब्यौरा देने का आदेश दिया था. कोर्ट ने अनिल शर्मा से पूछा था कि 2014 में चुनाव आयोग में दाखिल किए गए हलफनामे में 867 करोड़ की बताई गई सम्पत्ति 2018 में 67 करोड़ कैसे हो गई? कोर्ट से जानकारी क्यों छिपाई. कोर्ट ने आम्रपाली की 46 कंपनियों के फॉरेंसिक ऑडिट का भी आदेश दिया.

चार को कोर्ट ने कहा था कि अब तक ऐसा रियल एस्टेट फ्रॉड नहीं देखा है. कोर्ट ने कंपनी और उसके निदेशकों के बैंक खातों का फॉरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को स्वतंत्र ऑडिटर के नाम सुझाने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर 100 लोगों को जेल भेजना पड़ा, तो ये भी किया जाएगा. सुनवाई के दौरान नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) ने कोर्ट को बताया था कि आम्रपाली के सभी प्रोजेक्ट पूरे करने में करीब 8500 करोड़ रुपए लगेंगे. आम्रपाली की संपत्तियों को बेच कर इन पैसों का बंदोबस्त कर पाना मुश्किल है. बैंक से फंड लेने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन उसमें भी दिक्कत आएगी.

आठ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के प्रमोटर्स को चेतावनी दी थी कि वे कोर्ट से ज्यादा स्मार्ट न बनें अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. कोर्ट ने आम्रपाली समूह के प्रमोटर्स और निदेशकों से कहा था कि हम आपको बेघर कर देंगे और आपका एक एक इंच बेंच देगें अगर आप अपने अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पांच हजार करोड़ रुपए का इंतजाम नहीं करेंगे.

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