Saturday , 20 October 2018

वायु प्रदुषण पर 23 राज्यों को NGT की फटकार, 2 महीने के अंदर मांगी योजना

नई दिल्ली:राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली और चंडीगढ़ समेत 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए दो महीने के अंदर कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया है. एनजीटी ने जोर दिया कि 102 शहरों में वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है. न्यायाधिकरण ने वायु गुणवत्ता निगरानी समिति (एक्यूएमसी) गठित की है. इसमें पर्यावरण, परिवहन, उद्योग, शहरी विकास, कृषि विभाग के निदेशक और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के सदस्य-सचिव शामिल हैं.
एनजीटी ने कहा कि कार्य योजना बनाने में नाकाम रहने पर राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कार्य योजना तैयार करने को कहा गया है: उनमें महाराष्ट्र (17 शहर), उत्तर प्रदेश (15), पंजाब (9), हिमाचल प्रदेश (7), ओडिशा और मध्य प्रदेश (6-6 शहर), असम, आंध्र प्रदेश और राजस्थान (5-5 शहर); कर्नाटक (4), बिहार, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना (3-3 शहर), गुजरात, जम्मू-कश्मीर, नगालैंड और उत्तराखंड (प्रत्येक में 2 शहर) और झारखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मेघालय, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (प्रत्येक में) शामिल हैं.
प्राधिकरण ने कहा कि निगरानी समिति संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव की निगरानी में काम करेगी. एनजीटी ने 102 शहरों में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पर एक दैनिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कार्यवाही शुरू की है. सरकार ने देश में वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए एनसीएपी कार्यक्रम शुरू किया है.
एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कार्य योजना तैयार हो जाने के बाद उसे एक अन्य समिति के सामने रखा जाएगा. इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य-सचिव प्रशांत गार्गवा, आईआईटी दिल्ली के प्राध्यापक मुकेश खरे और आईआईटी-कानपुर के प्राध्यापक मुकेश शर्मा शामिल हैं. यह समिति योजना की जांच-परख करेगी. पीठ ने कहा कि कार्य योजना को 31 दिसंबर तक सीपीसीबी के पास भेजना होगा और सीपीसीबी के चेयरमैन अगले साल 31 जनवरी तक इसे मंजूर करेंगे.

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