Friday , 16 November 2018

जेटलीजी, क्या आपने देश की जनता को बेवकूफ समज रखी है क्या?

ऐसा तो शायद यूपीए सरकार में भी नहीं हुवा होंगा. पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम से जब समूचे देश में एक सुर में विरोध हुवा तब वित्त मंत्री अरुण जेटलीजी ने जो की सुप्रीम कोर्ट के वकील भी है, उन्होंने बाकायदा पत्रकार परिषद् बुला कर कच्चे तेल का खेल समजाया, इधर उधर की बाते की और मानो बड़ी खैरात कर रहे हो इस अंदाज में पेट्रोल और डीजल के दाम में सरकार की और से डेढ़ रुपैया और तेल कम्पनियों का एक रुपैया मिला कर ढाई रुपैया कम किया. राज्यों से अपील की तो भाजपाई राज्यों ने मानो पहले से तय हो ऐसे जेटलीजी की अपील सर आँखों पर लगा अपनी और से ढाई रुपैये मिला कर 5 रूपये कम किये तब महंगाई में पीस रही जनता लगा की कुछ राहत मिली. लेकिन उसके बाद दामो में फिर एक बार बढौती शुरू और अब जनता का हाल ये है की जेटलीजी ने जो बड़े अंदाज में राहत दी थी वह पुरी हो गई. दाम बढ़ते बढ़ते ढाई रूपये तक पहुँच गये १० दिन में ही. यानी तेली का बैल घूम के वही आ गया. जो राहत दी थी वह पूरी हो गई.

जनता हैरान है की वित्तमंत्री ने आखिर देश की जनता को समज क्या रखा है ? क्या वे ये मानते की जनता मुरख है, बेवकूफ है क्या? लोगो को लग रहा है ये क्या हो रहा है यार? एक और ढाई रूपये कम दूसरी और तेल कम्पनिया दाम बढ़ा रही है. ये तो वोही बात हुई की चोर को कहा चोरी कर और शाहकार को कहा जागते रहो..मेरे भरोसे मत रहो….! ऐसा घिनौना खेल जनता के साथ तो यूपीए सरकार में भी नहीं हुवा था. क्या ये लोगो के साथ मजाक नहीं की दाम कम करने की घोषणा के बाद दाम बढ़ाते रहना? सरकार भोले भाव से कहेंगे की तेल कम्पनियों पर सरकार का कोई काबू नहीं…! वित्तमंत्री जी, ये तेल कम्पनिया तेल कम्पनियों के अफसरों की दौलत से बनी है क्या? इसमें जनता का पैसा लगा है. तेल कंपनियां लोगो के लिए है या लोग तेल कम्पनियों के लिए? तेल कम्पनियों ने डेढ़ रुपिया जो कम किया वह एक ही हफ्ते में वसूल कर लिया. तो फिर जनता को मिला क्या ? ठेंगा ?

जेटलीजी कितने मासूमियत से कहा था की जो दाम कम किये उससे सरकार और तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ का घाटा होंगा साल भर में. लोग खुश थे चलो साल भर दाम नहीं बढ़ेंगे. मगर लोगो को सरकार और सरकार को कमाकर देनेवाली प्रीति तेल कंपनीयो ने सरेआम पंप का नोझल दिखा कर लूट लिया. सरकार के मन और विशेष कर वित्त मंत्री के मन में शायद ऐसा होंगा की जनता की समझ में कुछ आता जाता तो है नहीं. जो हम कहेंगे वे मान लेंगे. सरकार रात को दिन कहेंगी तो लोग कहेंगे वाह क्या सूरज चमक रहा है …! ये सूरज कब ढल जायेंगा पता भी नहीं चलेंगा.

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