Friday , 16 November 2018

सीरी पिलानी ने बनाए ई-पटाखे, अगली दिवाली तक आ जाएंगे बाजार में

झुंझुनू, 09 नवम्बर (उदयपुर किरण). देश में पॉल्यूशन फ्री दिवाली की बातें कई बार सामने आ चुकी है. सुप्रीम कोर्ट भी इसे लेकर इंतजार करने के निर्देश दे चुका है. इस पर केंद्र सरकार भी गंभीर है. झुंझुनू जिले के पिलानी में संचालित केन्द्रीय इलेक्ट्रोनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) के युवा वैज्ञानिकों ने ई क्रेकर्स, ई पटाखों को बनाया है. ये ई पटाखे बिना कोई तेज शोर और धुआं के आपकी दिवाली को अगले साल तक रोशन कर देंगे.

केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के निर्देश के बाद सीरी पिलानी के युवा वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को बनाया है जो अब अंतिम चरण में है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से हुए विचार-विमर्श के बाद सामाजिक दायित्वों को निभाते हुए सीरी पिलानी ने यह बीड़ा उठाया है और तीन अलग-अलग तरह के पटाखे ई-लड़ी, ई-चरखी और ई-अनार को तैयार किया गया है. संस्थान के निदेशक प्रो. शांतनु चौधरी ने बताया कि ये पटाखे इलेक्ट्रोनिक खिलौने जैसे हैं. जो आतिशबाजी को धुआं और तेज आवाज से मुक्त कर देंगे.

जिन युवा वैज्ञानिकों की टीम ने इस प्रोजेक्ट को हाथ में लिया है. उनका कहना है कि उन्होंने शुरूआती तौर पर यह तीन तरह के पटाखे बना दिए हैं. अब उन्हें इंतजार है कि कोई भी इंडस्ट्री और इनवेस्टर इसमें आगे आए. जिसके बाद अगली दिवाली तक वे इन ई पटाखों को मार्केट में ला सकेंगे. उन्होंने कहा कि इन पटाखों में एयर पॉल्यूशन जहां जीरो है. वहीं साउंड पॉल्यूशन को भी कंट्रोल किया गया है. यह कोर टेक्नॉलोजी में बनाया गया है. जिसका यूज कर और भी कई तरह के पटाखे बनाए जा सकते हैं.

इनको बनाने वाले युवा वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ई पटाखे जन सामान्य के पहुंच में भी रहेंगे. जिनकी कीमती 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगी. साथ ही खास बात यह है कि एक बार खरीदा गया ई पटाखा आगामी 10 सालों तक काम में लिया जा सकेगा. साथ ही इस दौरान होने वाले घर में अन्य खुशी के मौके पर भी ये ई पटाखे काम आ सकेंगे. उन्होंने बताया कि अभी जमीनी आतिशबाजी के तीन वर्जन बनाए गए हैं. लेकिन यदि कोई इंडस्ट्री आती है तो इसमें आसमानी पटाखों के बनाने की भी संभावनाएं हैं.

इन ई पटाखों को मूर्त रूप दिया है 6 युवा वैज्ञानिकों की टीम ने. जिसमें अंकुश जैन, आनंद अभिषेक, सुभाष कुमार राम, राहुल, नीरज कुमार और सुभाषचंद्र बोस शामिल हैं. इनका कहना है कि ई पटाखों के कारण ध्वनि और वायु प्रदूषण को तो रोका जा ही सकता है. साथ ही इन्हें चलाने में जोखिम की संभावनाओं को भी जीरो किया जा सकता है. साथ ही पटाखे चलाने बाद बिखरने वाले कचरे आदि से भी मुक्ति पाकर स्वच्छ भारत अभियान को भी साकार रूप दिया जा सकता है.

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