Monday , 21 January 2019
दुनिया को अमन के लिए इलम के साथ तालीम के ज़रूरत:  किछौछवी

दुनिया को अमन के लिए इलम के साथ तालीम के ज़रूरत: किछौछवी

लखनऊ. आॅल इण्डिया मोहम्मदी मिशन के ज़ेरे एहतमाम जश्ने गौसुलवरा का एहतमाम रैन्बो हास्पिटल हाॅल, हरदोई रोड, बालागंज में हुआ. जलसे की अध्यक्षता मिशन के अध्यक्ष सैयद अयूब अशरफ किछौछवी ने की. जश्न के खुसुसी मेहमान, सैयद याकूब अशरफ किछौछवी व सैयद बाबर अशरफ किछौछवी थेे. जलसे को खिताब करते हुए खतीबे अहले बैत सैयद तलहा अशरफ किछौछवी ने कहा कि आज ज़रूरत है हज़रत गौसे हज़रत अब्दुल जिलानी के बताए रास्ते पर चलने की. उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी सिराते मुस्तकीम पर गुज़ारी. हज़रत अब्दुल कादिर जिलानी के वालिदैन ने हमेशा तालीम पर ज़ोर दिया. उनकी इब्तेदाई तालीम ईरान के गिलान शहर में और उसके बाद आला तालीम के लिए आपको ईराक के बगदाद शहर भेजा. वही पर आपने अपना मसकन बना लिया. उन्होंने कुरआन की एक आयत इकरा का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस्लाम की पहली आयत इल्म के लिए उतरी. इस्लाम के आने से पूर्व के दौर को ‘‘दौरे जिहालत’’ कहा जाता था. लड़कियों के ज़िन्दा दफन किया जाता था. इस्लाम ने आते उस दौर के हाकिम अबुल हिकम को अबुल जहल कहा. जबकि होना यह चाहिए था कि जब इस्लाम आया तो उसे दौरे इल्म कहा जाना चाहिए था मगर इल्म अकेला सही रास्ते पर चलने के लिए काफी नहीं क्योंकि आज पूरी दुनिया में खूनरंेज़ी, कत्लोंगारद हो रहा है वह सिर्फ इल्म वाले ही कर रहे है चाहे अमेरिका की इराक से जंग, सीरिया को लेकर अमेरिका व रूस का आमने सामने होना, इन सब जंगो से बच्चे यतीम होते हैं, औरते बेवा होती है. कारोबार खत्म हो जाता है मुल्क के मुल्क बर्बाद कर दिए जाते हैं यह सब करने वाले जाहिल नहीं होते है बल्कि इल्म वाले होते हैं. इसीलिए जब इस्लाम आया तो सिर्फ इल्म नहीं दिया बल्कि उसके साथ-साथ रसूले पाक ने अपने सच्चे गुलामों की तरबियत भी की. तब जाकर कोई सिद्दीके अकबर, फारूके आज़म, उस्माने गनी, अली-ए-मुतुर्ज़ा बने. इसी तरह हज़रत गौसे आज़म की माँ ने इल्म की खातिर जब उन्हें बगदाद भेज रही थी तो जाते वक्त तरबियती जुमला भी कहा कि बेटा कभी झूठ न बोलाना. इस्लाम अरब से निकलकर पूरे एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका तक जा पहुँचा. लेकिन जब इसी के मानने वालों ने इल्म के साथ तरबियत में कमी आई तो फिलीस्तीन, सीरिया, लीबिया, सूडान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान जैसे मुल्क हुए जो इस्लाम का ज़वाल साबित हो रहे है. आज भी अगर मुसलमान न सुधरा तो उसका इससे बुरा हाल होगा. मुसलमान अगर तरक्की चाहता है तो जहां वह अपनी नस्लों को इल्म की तरफ ले जाते वक्त यह ख्याल रखें कही दुनियावी तालीम देते वक्त उससे नस्ल इस्लामिक तालीमात से भटक तो नहीं रही है. इससे हमें यह सबक मिलता है कि जो कौम तालीमात से हटती है वह तालीम से न हट करके बल्कि इंसानियत से हटती है. हम अपने बच्चों पर इल्म पाने के लिए स्कूल, काॅलेज या मदरसों में भेजते वक्त अच्छी तरबियत भी करें. जब सही इल्म और सही तरबियत मिलती है तब जाकर कोई गौसे आज़म, गरीब नवाज, महबूबे ईलाही, मख्दमू अशरफ जहांगीर बनता है. इसीलिए आज भी अमन के लिए सिर्फ पीस कांफ्रेंस करने से कुछ नहीं होगा बल्कि अपने बच्चों को अच्छी तालीम के साथ अच्छी तरबीयत भी करें. वही सराफराज मुस्तफा खान ने बताया कि रैन्बो हाॅस्पिटल में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान स्वास्थ्य सेवा उनके हाॅस्पिटल में मौजूद है जिसमें साल भर में 5 लाख रूपये तक ईलाज फ्री किया जाता है. जिन लोगों के नाम शामिल है वह यहां इलाज करा सकते है तथा जिन्हें अपने नाम के बारे पता लगाना वह भी आ सकते हैं. इस मौके पर मिशन यूथ अध्यक्ष सै. अहमद मियाॅ, हुसैन बोर्ड अध्यक्ष सैयद अरशद अशरफ, मिषन प्रवक्ता सैयद जुनैद अशरफ, डाॅ. शाहनावज मुस्तफा खान, नुडवा सेक्रेटी डाॅ. एस. एस. अशरफ, सैयद शाह अली हुसैन अशरफ, मुफ्ती ज़ाकिर हुसैन, मौलाना मुनव्वर हुसैन, मौलाना आज़म अली कादरी, कारी एैनुल हक, कारी मुईनुद्दीन, कारी अनवर, कारी शरफुद्दीन, कारी मसूद, कारी आरिफ रज़ा, मौलाना अनवार चिश्ती, कारी पीर मोहम्मद, सईद वारसी, मसूद सिद्दीकी, जलालुद्दीन अशरफी, सैयद जैनुलाब्दीन व कसीर तायदाद में लोग मौजूद थे.

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