Saturday , 11 July 2020

अस्पताल के सामने सड़क पर गर्भवती ने दिया बच्चे को जन्म

बांसवाड़ा . जिले के करणघाटी गांव के सरकारी अस्पतालों की निर्दयता का मामला सामने आया. गर्भवती महिला का पति जब उसकी डिलीवरी कराने के लिए गांव के प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में पंहुचा तो स्टाफ ने बिना जांच किये उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया. इसके बाद प्रसव पीड़ा ज्यादा होने के कारण पति गर्भवती को लेकर नजदीक के एक और सरकारी अस्पताल पंहुचा. लेकिन वहां भी उसे भर्ती करने से मना कर दिया. महिला के सफर करने की हालत में न होने से डेढ़ घंटे तड़पने के बाद सास ने अस्पताल के सामने सड़क पर डिलीवरी कराई.

गर्भवती महिला कांतु के पति मानसिंह अस्पतालों में जा कर अपनी पत्नी को भर्ती करने की गुहार करते रहे लेकिन किसी का भी दिल नहीं पसीजा. कांतु को सोमवार रात करणघाटी गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया तो उसे एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई गई. इसके बाद परिजनों ने निजी वाहन कर उसे बांसवाड़ा लेकर निकले. लेकिन रास्ते में दर्द बढ़ने के कारण वे उसे मोहकमपुरा अस्पताल ले गए. यहां भी डॉक्टरों ने कांतु को भर्ती करने से मना कर दिया और बांसवाड़ा ले जाने को कहा. लेकिन कांतु की प्रसव पीड़ा बढ़ जाने से आगे का सफर मुश्किल लग रहा था. इस कारण पति और सास ने अस्पताल के सामने ही रुकने का फैसला किया, इस उम्मीद से कोई खतरा हुआ तो शायद उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा.

अस्पताल से तो साडी उम्मीद टूट गई लेकिन एक सलून वाले ने मानसिंह को चादर दे कर उनकी मदद की. जिसकी आड़ में सास ने ही डिलीवरी कराई. करीब आधे घंटे बाद स्वास्थ्य केंद्र के मेल नर्स खानचंद ने सड़क पर ही बच्चे की नाल काटकर उन्हें कुलगढ़ जाने की सलाह दी और वहां से चला गया. परिवार ने अपने गांव लौटने का फैसला किया. रास्ते में उन्हें कुछ पुलिसवाले मिले. उन्होंने प्रसूता की हालत देखकर उसे कुशलगढ़ के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया.

उक्त मामले को लेकर चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. एचएल ताबियार ने कहा कि मोहकमपुरा में एक ही नर्सिंग कर्मी था, इसलिए प्रसूता को कुशलगढ़ जाने के लिए कहा गया था. वहां डॉक्टर नहीं होने और प्रसूता को भर्ती नहीं किए जाने पर कुशलगढ़ के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.