Sunday , 23 February 2020
कैदियों के लिए मताधिकार की मांग वाली याचिका खारिज

कैदियों के लिए मताधिकार की मांग वाली याचिका खारिज

नई दिल्ही.दिल्ली हाईकोर्ट ने कैदियों को वोट डालने का अधिकार देने की मांग वाली जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा, यह सुविधा कानून के तहत उपलब्ध है और इसे कानून के माध्यम से छीना भी जा सकता है. मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि मतदान का अधिकार कोई मौलिक अधिकार नहीं है.
मताधिकार का प्रावधान जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत है जो कानून द्वारा लागू सीमाओं के अधीन है और यह कैदियों को जेल से वोट डालने की अनुमति नहीं देता. पीठ ने कहा, शीर्ष कोर्ट के फैसले और कानूनी स्थिति के मद्देनजर यह याचिका विचार योग्य नहीं है. पीठ ने यह फैसला कानून के तीन छात्र प्रवीण कुमार चौधरी, अतुल कुमार दुबे, और प्रेरणा सिंह की याचिका पर सुनाया.
याचिका में देश की सभी जेलों में बंद कैदियों को मतदान का अधिकार देने का अनुरोध किया गया था. इसमें लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 62 (5) की वैधता को भी चुनौती दी गई थी जो कैदियों को मतदान का अधिकार नहीं देती है. निर्वाचन आयोग ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि कानून के तहत कैदियों को मतदान का अधिकार नहीं है और सुप्रीम कोर्ट भी इसका समर्थन करता है.