Saturday , 27 November 2021
क्या रूकेगा नगर निगम में ईपीएफ,ईएसआई घोटाला

क्या रूकेगा नगर निगम में ईपीएफ,ईएसआई घोटाला

लखनऊ. लखनऊ नगर निगम में लम्बे अरसें से चल रहा एक महाघोटाला रोकने की कवायद एक बार फिर की गई है. लगभग सात हजार कार्यदायी ठेका कार्मिकों को नियमानुसार ईपीएफ एवं ईएसआई से आच्छादित करने के लिए नगर निगम प्रशासन कार्यदायी संस्थाओं को भुगतान कर रहा है लेकिन ठेका कार्मिकों को इसका लाभ नही मिल पा रहा है. इसके लिए तत्कालीन मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी राजेन्द्र सिंह ने जनवरी 2017 में कार्यदायी संस्थाओं को परिपत्र जारी किया था लेकिन उस पर अब तक कोई अमल नही पाया. एक बार पुनः नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी के निदेश पर मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी महामिलन्द्र लाल आठ अगस्त 19 को कार्यदायी संस्थाओं को ईपीएफ और ईएसआई कटौती के प्रमाण के बाद ही भुगतान के निर्देश जारी किए है. अब प्रश्न यह उठता है कि नगर निगम प्रशासन के निर्देश के बावजूद अब तक कार्यदायी संस्थाओं द्वारा ठेका कार्मिकों हक के हड़पे गए करोड़ों रूपये की वसूली या फिर कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नही की गई.

हालांकि सूत्र बता रहे है कि कार्यदायी संस्थाओं की सूची निदेशालय स्तर पर तलब होने के बाद यह खेल अब लम्बे समय तक नही चलेगा.
निदेशालय स्तर पर स्थानीय निकायों में कार्यरत सेवानिवृत्त, नियमित, दैनिक वेतन भोगी, कार्यदायी कर्मचारियों का ब्यौरा वेतन भुगतान के सहित तलब किया गया है. ऐसे में निश्चित तौर से नगर निगम को अपने अधिनस्थ कार्यदायी संस्थाओं का ब्यौरा निदेशालय में देने ही पड़ेगा. नगर निगम लखनऊ में वर्तमान समय में हर विभाग यहाॅ तक कि मुख्यालय के लिपिकीय कार्य तक में कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारी कार्यरत है. लगभग 6200 से 6500 ठेका कार्मिक नगर निगम मुख्यालय, स्वास्थ्य विभाग, आर.आर. उद्यान, कैटिल कैचिंग, अभियंत्रण एवं कर विभाग में लगभग 30.32 कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से कार्यरत है. इन कार्मिकों की प्रदात्ता कार्यदायी संस्थाएं लम्बे अरसे से निगम से इनके नाम पर ईपीएफ एवं ईएसआई के नाम पर पैसा वसूल करती आ रही है लेकिन इनके नाम से यह पैसा जमा नही किया जा रहा है. मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा जारी नए दिशा निर्देशों में कार्यदायी संस्थाओं के बार में कहा गया है कि कार्यदायी संस्थाओं द्वारा ईपीएफ एवं ईएसआई का भुगतान नही किया जा रहा है. उन्होने संख्त शब्दो में लिखा है कि ईपीएफ और ईएसआई का ईसीआर उपलबध न कराये जाने की दशा में उक्त बिलों में उल्लेखित धनराशि का भुगतान तब तक रोक दिया जाए जब तक कि वर्ष 2018-19 में जमा धनराशि की पावती प्राप्त न हो जाए.निर्देश में यह भी कहा गया कि विभाग द्वारा पत्रावली के परीक्षण के समय फर्म के साथ निष्पादन के समय अनुबंध का अध्ययन कर लिया जाए. अनुबंध में ईपीएफ एवं ईएसआई का उल्लेख होने पर ही उसे स्वीकार किया जाएगा. ऐसी पत्रावलियाॅ जिन पर ईपीएफ ईएसआई के साथ स्वीकृतियाॅ प्राप्त कर ली गई है परन्तु फर्म के अनुबंध पत्रों में उक्त का उल्लेख नही है तो इसकी देयता नही होगी. यही नही सौ रूपये के स्टाम्प पेपर की जगह दस रूपये के स्टाम्प पेपर तय शर्तो की अनदेखी कर किये गए अनुबंध पत्रों की जानकारी देते हुए विभागाध्यक्षों कों नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई है. यानि कुल मिलाकर निगम में कई फर्म नियमों की अनदेखी कर काम कर रही है. केन्द्रीय श्रम मंत्रालय द्वारा दैनिक मजदूरों के सम्बंध में सख्त नियमावली के बावजूद कार्यदायी संस्थाए मानव श्रम अधिनियम का खुला उल्लंघन करती आ रही है. न्यूनतम मजदूरी से लेकर ईपीएफ, ईएसआई तक में खेल चल रहा है. नगर निगम में कार्यरत श्रमिकों को निर्धारित मानदेय भी नही मिलने की खबरें प्रकाश में आती रही है. जब किसी मजदूर या कर्मचारी ने निर्धारित वेतन की मांग रखी तो उसे डरा धमकाकर या फिर नौकरी छोड़ने की धमकी दी जाती है. एक तरफ लेखा विभाग को इसकी जानकारी होने के बावजूद लेखा विभाग ‘‘ चित्त भी अपना पट्ट भी अपना ’’ की शैली अपनाते हुए भुगतान पत्रावली आगे बढ़ा देता है. कई विभागों में एक एक वर्ष बीत जाने के बावजूद कार्यदायी श्रमिकों और कर्मचारियों का कोई लेखा जोखा नही है. महामिलिन्द लाल मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, नगर निगम ने बताया कि नगर निगम में लगभग 6200 कर्मचारी विभिन्न संवर्ग में कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से कार्यरत है. हम कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान तभी करेगें जब हमें कार्यदायी संस्था ईपीएफ एवं ईएसआई भुगतान का प्रमाण देगी. जहाॅ तक इसका अनुपालन न करने पर ब्लेक लिस्टेड करने की बाॅत है तो यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नही है.

सवाल पर भड़क गए नगर आयुक्त
पिछली कार्यकारिणी के दौरान मेयर द्वारा सार्वजनिक रूप से हिसाब किताब न देने की गम्भीर टिप्पणी का शिकार हुए नगर आयुक्त ने एक जून 2018 को नगर निगम का कार्यभार सम्हाला था इनके इन 15 महीने के कार्यकाल में कार्यदायी संस्था के 6200 के करीब कार्मिकों 12 प्रतिशत ईपीएफ एंव 4 प्रतिशत ईएसआई का पैसा जमा नही हुआ. ऐसे में क्या इन्हें इस बाॅत की जानकारी नही थी ? इस 15 माहों में लाखों रूपये के इस गोलमाल की जिम्म्मेदारी से क्या मुक्त माने जाएगे ? इस सम्बंध में जब प्रतिनिधि ने नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी से उनके मोबाईल नम्बर 6389932222 पर कार्यदायी संस्थााओं के द्वारा ईपीएफ और ईएसआई की धनराशि जमा न करने वाली कार्यदायी संस्थाओं पर किस तरह की कार्रवाई किये जाने का प्रश्न किया तो वे भड़क गए. उन्होंने कहा कि मीडिया वाले हमारे पास आते है, हम सभी को इसकी जानकारी नही देते. आपकों इस कटौती से क्या लेना देना है.