Wednesday , 23 May 2018
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खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे

खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे

नई दिल्ली. कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी. इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति होगी. इससे ईंधन के आयात के बिल में हर साल 4,000 करोड़ रु. तक कमी आएगी. अभी गन्ने से बने एथनॉल को ही पेट्रोल में मिलाने की अनुमति है. बायोफ्यूल को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मंजूरी से सरप्लस खाद्यान्न के इस्तेमाल की भी अनुमति दी गई है.

बायोफ्यूल की तीन श्रेणी बनाई गई हैं. शीरे से बने एथनॉल और गैर-खाद्य तिलहन से बने बायो-डीजल को पहली पीढ़ी (1जी) में रखा गया है. नगरीय निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे से बना एथनॉल दूसरी पीढ़ी (2जी) का होगा. बायो-सीएनजी तीसरी पीढ़ी (3जी) का बायोफ्यूल होगा. सरकार यूज्ड कुकिंग ऑयल और कम अवधि की फसलों से बायो-डीजल के लिए सप्लाई चेन मैकेनिज्म बनाने को बढ़ावा देगी.

5,000 करोड़ का वायबिलिटी गैप फंड: छह साल के लिए 5,000 करोड़ रु. का वायबिलिटी गैप फंड बनेगा. इससे कंपनियों के नुकसान की भरपाई होगी. कंपनियां 1जी के मुकाबले 2जी एथनॉल की कीमत ज्यादा रख सकेंगी. टैक्स इन्सेंटिव भी मिलेगा.

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