Thursday , 27 February 2020
गायत्री मंत्र की आहुतियों से आध्यात्मिक हो गया वातावरण,बसन्ती रंग में सराबोर हुई यज्ञशाला

गायत्री मंत्र की आहुतियों से आध्यात्मिक हो गया वातावरण,बसन्ती रंग में सराबोर हुई यज्ञशाला

बाराबंकी . अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित जनजागरण, व्यसन मुक्ति आन्दोलन एवं 51कुण्डीय गायत्री महायज्ञ समारोह में दूसरे दिन प्रातः काल से ही यज्ञशाला परिसर में याजकों का आगमन शुरू हो गया. शांति कुंज हरिद्वार से आयी केन्द्रीय टोली द्वारा अलौकिक वैदिक विधान से सर्वतों भद्र पूजन, मंगलाचरण के साथ माँ दुर्गा, काली, लक्ष्मी, गौरी, सरस्वती, ऋतम्भरा, प्रज्ञा, विध्नविनाशक गणेश, परिवर्तन एवं संहार के देवता भगवान शिव, ब्रह्मा, विष्णु सहित 33 कोटि देवशक्तियों का आवाह्न किया गया तत्पश्चात् कई पालियों में विशाल यज्ञशाला में हिमालय की जड़ी बूटियों से निर्मित सुंगन्धित हवन सामग्री से परिजनों ने आहुतियाँ समर्पित की, सम्पूर्ण परिसर बसन्ती रंग में सराबोर हो गया है, गायत्री मंत्र के उच्चारण एवं महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियों से सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक हो गया है.  अपराह्नन 2ः00 बजे प्रवचन मंच पर युवा गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें समाज में द्विगभ्रमित हो रही युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन दिया गया, केन्द्रीय टोली नायक ने उपस्थित युवाओं से अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि हमारे देश की 70 प्रतिशत आबादी युवा है, लेकिन युवा पीढ़ी आज दुव्र्यसनों में दारू, शराब, गांजा, भांग, मारफीन, गुटखा, खैनी खाकर खोखला होती जा रही है, दूषित चिन्तन, दूषित खान-पान, आहार-विहार, अनियमित दिनचर्या के कारण युवाओं में आलस्य एवं प्रमाद आता जा रहा है, गलती करना बुरा नहीं है, बल्कि गलती को न सुधारना बुरा है, रावण जैसा विद्वान अपने दुष्कृत्यों से राक्षस बन गया, रत्नाकर नाम का डाकू महर्षि बाल्मीकि तथा सूर और तुलसीदास जैसे कामान्ध लोगों ने अपने जीवन को बदल लिया तो महापुरूष बन गये, पूज्य गुरूदेव पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं वन्दनीय माता भगवती देवी शर्मा ने राष्ट्र के युवाओं से गायत्री परिवार से जुड़कर चारित्रिक, नैतिक एवं सामाजिक उत्थान करने के लिए आवाहन किया है.  सांयकाल प्रवचन मंच पर युग संगीत प्रवचन सम्पन्न हुआ जिसमें मंचासीन केन्द्रीय टोली नायक राजकुमार भृगु, शम्भू पाण्डेय (गायक), हुकुम चन्द्र (वादक), बनवारी लाल सैनी (सहायक) द्वारा गुरूवन्दना ‘सत्संग है ज्ञान सरोवर, सुख की खान रे बन्दे, सत्संग से ही मिलते सचमुच भगवान रे वन्दे’ प्रस्तुत किया, तत्पश्चात् पण्डाल में मौजूद जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए टोली नायक ने कहा कि मनुष्य का जन्म बड़े भाग्य से मिलता है, मनुष्य को स्र्वाथ का ज्ञान है, लेकिन मनुष्यता प्राप्त करना है, कई जन्मों का पुण्य उदय होने पर मानव जन्म प्राप्त होता है, सत्संग के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को धन्य बना सकता है, भगवान को केवल निर्मल मन ही पसन्द है, गोस्वामी जी ने लिखा है ‘‘बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सद्ग्रन्थन गावा’’ बड़े भाग्य से यह मनुज तन मिला है, गवाते गवाते उमर पार कर दी, प्रस्तुत गीत को काफी सराहा गया.उन्होनें कहा कि अपने परिवारों में संस्कार परम्परा को पुर्नजीवित करेें, पूज्य गुरूदेव ने षोडस संस्कारों को बताया है, पुंसवन, नामकरण, अन्नप्रासन, विद्यारम्भ, जन्मदिन, यज्ञोपवीत, दीक्षा, विवाह दिवसोत्सव आदि संस्कारों का प्रचलन घरों में शुरू करें, बच्चों में प्रणाम, अभिवादन की आदत डाले, भारतीय संस्कृति को जिन्दा रखना है तो पूज्य गुरूदेव के बताये सद्मार्ग पर चलकर जीवन में आमूलचूल परिवर्तन कर सकते हैं, कार्यक्रम स्थल पर बनी यज्ञशाला, संस्कार शाला की परिक्रमा एवं प्रखर प्रज्ञा, सजल श्रद्धा के दर्शन का तांता दिनभर लगा रहा, युग ऋषि द्वारा रचित जीवन्त एवं जागृत, प्रेरणादायी पुस्तकें जनमानस में एक अमिट छाप छोड़ रही हैं, साहित्य स्टाॅलों पर ज्ञान प्रसाद लेने की होड़ लगी हुयी है.