Friday , 20 April 2018
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गुप्त साधनाओं का जागृत धाम उदासीन धूँणी

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धर्म धामों से भरे भारतवर्ष में हर क्षेत्र में लोक श्रद्धा के प्राचीन आस्था धाम विद्यमान हैं जिनके प्रति स्थानीयों से लेकर दूर-दूर तक भक्तों की भावनाएं जुड़ी रही हैं. प्रभु श्रीनाथजी की नगरी श्रीनाथद्वारा भी धर्मधामों का गढ़ रहा है जहाँ खूब सारे श्रद्धास्थल मौजूद हैं और इनके प्रति धर्मावलम्बियों की गहरी आस्था रही है. इन्हीं में एक है नाथद्वारा शहर के कोठारिया मोड की पहाड़ी पर अवस्थित उदासीन धूंणी धाम. सिद्ध महात्माओं ने नाथद्वारा में धूंणी स्थापित कर इसे जागृत किया. यह परंपरा प्रभुश्रीनाथजी के नाथद्वारा आगमन से पूर्व की है तथा पहले यह धूँणी उसी सिंहाड़ क्षेत्र में थी जहां आज श्रीनाथजी बिराजे हैं.

भक्तों को मिलता है दिली सुकून : यहीं पर दक्षिणमुखी हनुमान की प्राचीन मूर्ति है. जिसके बारे में कहा जाता है कि यह बहुत ही जागृत एवं चमत्कारिक है. मनोकामना पूर्ति औ संकट निवारण करने वाले बजरंगबली के प्रति भक्तों की अगाध आस्था है. पुराना पीपल पूजनीय है वहीं दूसरी ओर गजारूढ़ शनिदेव की मूर्ति है. शनि की बाधाओं और पनौती से प्रभावित लोगों के लिए यह खास सुकूनदायी है जहाँ आकर भक्तजन हनुमानजी से शनि के प्रकोप के निवारण की प्रार्थना करते हैं और शनि मूर्ति पर तेल से अभिषेक करते हैं व तेल के दीपक प्रज्वलित कर शनि महाराज को प्रसन्न करते हैं. इसके अलावा भक्तगण काले पदार्थों का दान करते हैं और पीपल की पूजा कर दीप दान करते हैं.

शनि प्रभावितों को मिलता है सुकून : शनि की ढैया और साढ़े साती उतरने के समय यहाँ भक्तों का दिन-रात जमघट लगा रहता है और शनि प्रभावित लोग रात्रि जागरण एवं भजन-कीर्तन करते हैं तथा अगले दिन प्रभात में स्नान-ध्यान और शनि ग्रह के दर्शन-पूजन करने के बाद अपने घर लौटते हैं.

सिद्धों की समाधियाँ : उदासीन धूँणी पर करीब 400 साल से सिद्धों की परंपरा रही है जिनके चमत्कार सुनाते हुए भक्तजन आज भी रोमांचित हो उठते हैं. बाबा सेवादास के बारे में कहा जाता है कि सुक्खा माली उनका परम भक्त था जिसकी मृत्यु का समाचार पाकर वे उसके घर गए और जैसे ही पानी के छींटे उसके मुँह पर मारे, वह जीवित हो गया. इसके कुछ समय बाद बाबा सेवादास ने जीवित समाधि ले ली.

दिव्य और दैवीय प्रभाव : इस जीवित समाधि के बारे में कहा जाता है कि यह चमत्कारिक है तथा श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं को पूरा करती है. यहाँ आने वाले भक्तों को कई बार बाबा सेवादास दिव्य रूप में दर्शन प्रदान कर चुके हैं. भक्तों का यह भी मानना है कि यहाँ अक्सर सिद्धों का दिव्य रूप में सूक्ष्म अनुभव भी होता है.  आश्रम परिसर के पहाड़ में एकान्तिक साधना के लिए छोटी-छोटी गुफाएं हैं जिनमें जप-तप और ध्यान से सिद्धि प्राप्ति जल्दी होती है.

– डॉ. दीपक आचार्य

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