Sunday , 28 November 2021
डिफाल्टर 09 चीनी मिलों के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज

डिफाल्टर 09 चीनी मिलों के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज

लखनऊ. आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, उद्योग श्री संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि प्रदेश के गन्ना किसानों का गन्ना मूल्य का भुगतान कराना शासन की प्राथमिकता है, जिसको ध्यान में रखते हुए शासन एवं विभागीय स्तर पर गन्ना मूल्य भुगतान की नियमित समीक्षा की जा रही है. इस शासनकाल में रू.73,520 करोड़ का रिकार्ड गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को किया गया है.
उन्होंने बताया कि बकायेदार चीनी मिलों को सम्पूर्ण गन्ना मूल्य का भुगतान अविलम्ब सुनिश्चत करने के निर्देश देते हुए लापरवाह मिलों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की चेतावनी दी गई है. परिणाम स्वरूप गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी लाते हुए मिलों ने विगत 03-04 दिनों में 450 करोड़ का भुगतान किया है. डी.एस.सी.एल., डालमिया, द्वारिकेश समूहों एवं एकल मिलों विसवा, परसेंडी, पीलीभीत, दौराला एवं टिकौला द्वारा शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कर दिया गया है. इसके अतिरिक्त धामपुर चीनी मिल की इकाई धामपुर एवं रजपुरा को छोड़कर शेष तीन इकाईयों द्वारा तथा बलरामपुर समूह की गुलरिया एवं कुम्भी को छोड़कर शेष आठ इकाईयों द्वारा देय गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है. इसके अलावा सहकारी चीनी मिल नजीवाबाद तथा निगम की मुण्डेरवा एवं पिपराईच चीनी मिलों का भी शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित हो चुका है. इस प्रकार अब तक कुल 30 चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2018-19 में सम्पूर्ण देय गन्ना मूल्य का भुगतान सुनिश्चित कर दिया गया है. आगामी 03-04 दिनांे में रू.500 करोड़ का और भुगतान होना सम्भावित है, जिससे लगभग 20 अन्य चीनी मिलों का भी शत-प्रतिशत भुगतान होने का अनुमान है. इनके मिल प्रबन्धनों ने शत-प्रतिशत भुगतान के लिए आश्वस्त किया है. पेराई सत्र 2018-19 में चीनी मिलों द्वारा अब तक कुल देय गन्ना मूल्य रू.33,048 करोड के सापेक्ष रू.27,460 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है. गन्ना आयुक्त द्वारा यह भी बताया गया कि बार-बार निर्देशों के बावजूद गन्ना मूल्य भुगतान में उदासीन रहने वाली 09 चीनी मिलों के विरूद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3-7 एवं भारतीय दण्डसंहिता की धारा 420 एवं 120 (बी) जैसी गम्भीर धाराओं में एफ.आई.आर. दर्ज करायी जा चुकी है. यदि गन्ना मूल्य के भुगतान के प्रति उनके द्वारा तेजी नहीं लायी जाती है तो आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3-7 एवं अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्यवाही करने के साथ ही वसूली प्रमाण-पत्र (आर.सी.) जारी करने की प्रक्रिया अमल में लायी जाएगी.