Saturday , 27 November 2021
दिल्ली सरकार के अस्पताल प्रशासन का अमानवीय चेहरा सामने आया – विजेन्द्र गुप्ता

दिल्ली सरकार के अस्पताल प्रशासन का अमानवीय चेहरा सामने आया – विजेन्द्र गुप्ता

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने आज एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुये दिल्ली सरकार के दीपचंद बंधु अस्पताल के डाॅक्टरों द्वारा गर्भवती महिला को भर्ती न करने के कारण अस्पताल की पार्किंग में हुई डिलीवरी की भत्र्सना करते हुये कहा कि दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवायें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. केजरीवाल सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर हजारों करोड़ रूपये खर्च कर रही है, लेकिन प्रसव पीड़ा से तपड़ती हुई महिला के साथ डाॅक्टरों के दुव्र्यवहार के कारण उसे पार्किंग में डिलीवरी करनी पड़ी. यह घटना दिल्ली सरकार के अस्पतालों की वास्तविक स्थिति और मरीजों के प्रति उनका रवैया दर्शाता है.

विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलकर पूरे मामले की विजिलेंस जांच की मांग की जायेगी. जब तक पीड़ित को इंसाफ नहीं मिल जाता है तब तक चुप नहीं बैठेंगे. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र जैन और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालिवाल भी चुप्पी साधकर बैठी हुई हैं, जबकि 21वीं सदी में दिल्ली सरकार के दीपचंद बंधु अस्पताल में रात 1 बजे प्रसव से कुछ मिनट पहले एक महिला (राधा) अस्पताल से पर्चा बनवाकर भर्ती होने के लिये दर-दर भटकती है लेकिन इमरजेंसी वार्ड से भी उसे बाहर निकाल दिया जाता है. अस्पताल की पार्किंग में उसकी सास और आंटी की मदद से डिलीवरी कराई जाती है लेकिन अस्पताल प्रशासन मूक दर्शक बनकर देखता रहता है.

गुप्ता ने इससे शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता कि डिलीवरी के एक घंटे तक जच्चा-बच्चा सड़क पर पड़े रहते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन फिर भी उनकी मदद के लिये आगे नहीं आता और पीड़ित महिला राधा से अस्पताल प्रशासन अपने पक्ष में खुद लिखे झूठे पत्र पर अंगूठा लगवा लेता है जिससे उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही न हो सके. इससे स्पष्ट होता है कि अस्पताल प्रशासन संवेदनहीन हो चुका है और इस पूरी घटना को रफा-दफा करने के लिये अस्पताल प्रशासन के साथ स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आपस में मिले हुये हैं.

इसके बाद पुलिस को फोन करके बुलाया जाता है और पुलिस की मदद से जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है. इस अमानवीय घटना की पूरी वीडियो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भेजी गई, लेकिन बात-बात पर बयान देने वाले केजरीवाल की चुप्पी तीन दिन से अभी तक नहीं टूटी है. गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना न लागू करने वाले और डेंगू के नाम पर 100 करोड़ का विज्ञापन देने वाले अरविंद केजरीवाल दोषियों के साथ खड़े हैं क्योंकि पीड़ित लोग झुग्गी-बस्ती में रहने वाला परिवार है.

यदि दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू की गई होती तो गरीब परिवारों को अस्पतालों में 5 लाख रूपये का मुफ्त इलाज मिलता और उन्हें दर-दर भटकना नहीं पड़ता. दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वश्रेष्ठ कहने वालेे अरविंद केजरीवाल के सामने दिल्ली सरकार के अस्पतालों का यह असली चेहरा है जिसे वो दिल्ली की जनता से छुपाते रहते हैं.