Monday , 25 June 2018

दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दी

हाई कोर्ट ने भ्रूण सुरक्षित रखने के निर्देश

जबलपुर . मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश के जरिए दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है. खंडवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि 18 जून को डॉक्टर्स की स्पेशल टीम के जरिए गर्भपात प्रक्रिया पूरी की जाए. इसके बाद भ्रूण को सुरक्षित रखा जाए. ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रायल कोर्ट में दोष सिद्धि के लिए इसकी उपयोगिता होगी.

jabalpur-high-sourt गुरुवार को न्यायमूर्ति वंदना कासरेकर की समर वेकेशन बैंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान याचिकाकर्ता खंडवा निवासी सुनयना (काल्पनिक नाम) की ओर से अधिवक्ता आनंददत्त मिश्रा ने पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता नर्मदा नगर थाना क्षेत्र खंडवा निवासी युवती 20 वर्षीय है. आरोपी युवक ने शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ दुष्कर्म किया. इस वजह से वह गर्भवती हो गई.

एसपी को शिकायत सौंपने के बाद मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें गर्भवती होने की पुष्टि हुई. इसके बाद पहले सीएमएचओ फिर सेशन जज के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करके मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट-1971 की धारा-3 के तहत गर्भपात की अनुमति दिए जाने की मांग की गई. जब आवेदन खारिज कर दिया गया, तो हाई कोर्ट की शरण ले ली गई.

दुष्कर्म पीड़िता की ओर से अविक्ता आनंद दत्त मिश्रा ने इस बात पर बल दिया कि दुष्कर्मी के बच्चे को जन्म देने पीड़िता को बाध्य नहीं किया जा सकता. लिहाजा इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश की रोशनी में हाई कोर्ट से इंसाफ अपेक्षित है. यदि दुष्कर्मी के बच्चे को जन्म देने बाध्य किया गया तो सामाजिक दृष्टि से याचिकाकर्ता का जीवन बर्बाद हो जाएगा. उसकी संतान नाजायज कहलाएगी. उसकी शादी भी मुश्किल हो जाएगी. उसे आजीवन कदम-कदम पर अपमानित होना पड़ेगा.



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