Sunday , 28 November 2021
धनबाद: पानी में फ्लोराइड व आर्सेनिक से 26 गांव के लोगों की हड्डियां हुईं कमजोर

धनबाद: पानी में फ्लोराइड व आर्सेनिक से 26 गांव के लोगों की हड्डियां हुईं कमजोर

धनबाद.झारखंड में धनबाद जिले के एक गांव से एक ऐसी बीमारी का पता चला है जिससे लोग जवानी में बुढ़ापे की ओर जा रहे हैं. जहां कम उम्र के युवा भी अधेड़ दिखते हैं. यहां के पानी में अत्यधिक फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा होने के कारण आसपास के 26 गांव के लोगों की हड्डियां कमजोर हो चुकी हैं. धरती से निकलने वाले इस जहर से 26 गांव प्रभावित हो रहे हैं. यह मामला जिला मुख्यालय धनबाद से करीब 35 किलोमीटर दूर घड़बड़ गांव का है. इस गांव के पानी में फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण 26 गांव के लोगों की हड्डियां कमजोर हो चुकी हैं. वहीं इस घड़बड़ गांव में 30 से 40 की उम्र में ही युवा वृद्ध दिखने लगते हैं. यहां के लोगों की पैर व रीढ़ की हड्डियां 40 साल के बाद सीधी नहीं रह जाती हैं.
इस गांव में शायद ही कोई ऐसा घर बचा होगा, जिसमें हड्डी से संबंधित रोग के मरीज नहीं होंगे. हाथ-पैर टेढ़ा और कमर से झुक चुके इंसान हर घर में देखने को मिलते हैं. यहां के युवाओं के दांत पीले हो कर खराब हो हो रहे हैं. जहां तक की इस बीमारी की वजह से इन इलाकों में अपनी बेटियों की शादी करने से लोग कतराने लगे हैं. यहां के युवा निराशा से भरकर कहते हैं कि यहां लोग अपनी बेटियों का रिश्ता लेकर तो आते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें यहां की समस्या के बारे में पता चलता है तब वे बगैर रिश्ता पक्का किए वापस लौट जाते हैं. घडबड़ पंचायत का ब्राह्मण टोला हो या फिर धीवर बाऊरी टोला सभी गांव में अच्छे घर, अच्छी सड़क, बिजली, डिश टीवी और नेट आदि की सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन धरती के नीचे से फ्लोराइड के रूप में निकलने वाले मीठे जहर की बूंद से पूरा गांव बीमारी से ग्रस्त हो चुका है. यहां तक कि बलियापुर स्वास्थ्य केंद्र में इन रोगों की जांच और उसके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. यहां तक कि धनबाद के पेयजल स्वच्छता विभाग ने अब तक स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है.
बलियापुर स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. सर्वजीत सिंह कहना है कि फ्लोराइड को दूर करने का एक मात्र विकल्प दूसरे जगह से स्वच्छ जल की आपूर्ति ही एक मात्र रास्ता बचा है. पानी गर्म करने से भी फ्लोराइड दूर नहीं होता. वहीं इस समस्या पर सरकारी पहलकदमी में भी लापरवाही साफ-साफ दिखाई देती है. पेयजल विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन हैंडपंपों में पीने योग्य पानी नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि 55 करोड़ की लागत से गांव में पानी पहुंचाने के लिए जलापूर्ति योजना का कार्य चल रहा है. नवंबर 2018 में इस जलापूर्ति योजना को शुरू होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से अब तक यहां जलापूर्ति योजना शुरू नहीं हो सकी है. वहीं स्थानीय झामुमो नेता देबू महतो ने इस महीने में वॉटर प्लांट नहीं चालू होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.