Friday , 20 April 2018
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प्रदेश भर का पहला अनुठा मंदिर जिसमें 24 चक्रेश्वरी देवी यक्ष-यक्षिणी जिन शासन देव होंगे विराजित

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51 हजार वर्ग फिट परिसर वाले मंदिर में 51 खम्भों से बना जिनालय ध्यान साधना केन्द्र भी होगा मन्दिर का आकर्षण

उदयपुर किरण के लिए धरणेन्द्र जैन की खास स्टोरी

उदयपुर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर बलीचा के पास आर्यिका सुप्रकाशमति माताजी के सान्निध्य में 25 करोड रूपएं की लागत से निर्माणाधीन कामधेनु शांतिनाथ जिन मंदिर आकार लेने लगा हैं . आर्किटेक्ट हसमुख सोमपुरा (सिरोही) ने बताया की 51 हजार वर्ग फिट क्षेत्रफल वाले परिसर में 51 खम्भों व अष्ठ द्वार वाले सप्त शिखरीय कामधेनु शांतिनाथ जिन मंदिर के निर्माण में गुजरात के अम्बाजी व राजनगर के सफेद संगमरमर से बनाया जा रहा हैं . जिसे सिरोही के कारीगरों द्वारा तराशा जा रहा हैं . मङ्क्षदर के प्रथम तल पर स्थित मुख्य मंदिर के गर्भगृह में त्रिमुर्ति मुलनायक 16 वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ एवं 8 वें तीर्थंकर भगवान चन्द्रप्रभु व 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान की जयपुर में निर्मित अष्ट धातु निर्मित प्रतिमाएं विराजित होगी . वहीं नीचे की ओर 24 चक्रेश्वरी देवी यक्ष-यक्षिणी जिन शासन देव विराजित होंगे जो प्रदेश भर का पहला अनुठा मंदिर होगा . जिसमें ईच्छापूर्ण ज्वालानामालिनी मॉ की प्रतिमा मुलनायक होगी . क्षेत्र का निर्माण मुम्बई के प्रसिद्ध वास्तुविज्ञ डॉ. सम्पत सेठी व आर्यिका सुप्रकाशमति माताजी के निर्देशन में हो रहा हैं .

मंदिर परिसर में यात्रियों के ठहरने के लिए हो रहा हैं सुविधायुक्त यात्रीशाल का निर्माण

मंदिर परिसर में संतों के निवास के लिए संतशाला बन कर तैयार हैं . यात्रिओं के ठहरने के लिए सम्पूर्ण सुविधायुक्त 20 कमरों व 2 हॉल वाली यात्रिशाला एवं भोजनशाला, चातुर्मास मंगल कलश स्थापना सहित विविध धार्मिक आयोजन के लिए त्रिलोक मयंक जी सांखला के सहयोग से धर्मसागर सभागार व मुनी दयासागर मंच का निर्माण किया गया है . ध्यान योग केन्द्र का निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं . जिसमें एक साथ पॉच सौं धर्म प्रेमी बैठकर साधना कर सकेंगे .

संस्कार यात्रा से जैन धर्म व संस्कृति को बचाने के हो रहे हैं प्रयास

ध्यानोदय क्षेत्र बलिचा में चार्तुमासरत आर्यिका सुप्रकाशमति माताजी ने देश भर में 55 हजार किमी पद यात्रा व संस्कार यात्रा से जैन धर्म व संस्कृति को बचाने के प्रयास के साथ ही सुप्रकाश मंच की 21 शाखाएं बनाकर समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया हैं . माताजी के निर्देशन में बलिचा में विशाल जिन मन्दिर निर्माण के साथ ही सलुम्बर-बांसवाड़ा मार्ग पर शेषपुर मोड पर त्रिमुर्ति अभिन्नदन साधना केन्द्र सहित कई धार्मिक स्थलों का विकास कराने के साथ ही प्रसिद्ध जैन तीर्थ सम्मेद शिखर की 111 बार एवं दक्षिण भारत में स्थित श्रवणबेलगोला पर्वत की 251 बार वंदना की हैं .

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