Tuesday , 2 June 2020

प्रवासी मजदूरों के लिए 13 मई से ही बसें जुटाने में जुट गई थीं प्रियंका

नई दिल्ली.देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए कांग्रेस द्वारा बसों की व्यवस्था किए जाने पर हो रही राजनीतिक बहस के बीच इस बात का खुलासा हुआ है कि पार्टी 13 मई से ही बसों की व्यवस्था करने में जुट गई थी और महज तीन दिनों के अंदर 1,400 से अधिक बसों का बंदोबस्त किया गया और इसके साथ ही गुप्त रूप से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के निकट 300 से अधिक बसों की भी व्यवस्था की गई. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जो कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की पार्टी प्रभारी भी हैं, फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था करने के लिए पार्टी द्वारा की जा रही तैयारियों पर कड़ी नजर रखी हुई थीं.
कांग्रेस की यह वर्तमान योजना अचानक से ही सामने नहीं आई. बसों की व्यवस्था करने वाली टीम और इस पूरे अभियान का हिस्सा रहे कांग्रेस के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों के लिए बसें उपलब्ध कराने की योजना 13 मई को बनाई गई थी और उसी दिन पार्टी ने प्रिंयका गांधी संग इस पर चर्चा की और इसे अंतिम रूप दिया गया.” उन्होंने कहा कि महज तीन दिन के अंदर पार्टी ने भरतपुर, दौसा, उदयपुर, अलवर और जयपुर जैसे राजस्थान के विभिन्न जिलों से 700 से अधिक बसों की व्यवस्था की. उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने हरियाणा से 350 से अधिक, दिल्ली में 300 से अधिक और उत्तर प्रदेश में 300 बसों का इंतजाम किया.
बसों की व्यवस्था की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए कांग्रेस के इस नेता ने कहा, “हमने उन बस ऑपरेटरों से संपर्क किया, जो इन राज्यों के कई जिलों में बसों का संचालन करते हैं.”उन्होंने कहा कि कुछ ऑपरेटरों के पास दो, तीन, दस, पंद्रह या पचास बसें मौजूद थीं और उन्होंने हमें ये बसें प्रदान कीं. वह कहते हैं, “इस तरह से हमने प्रवासी मजदूरों के लिए तीन दिन से कम समय के अंदर 1,400 से अधिक बसों की व्यवस्था की.” उन्होंने कहा कि हमने उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लिया. इसके साथ ही नेता ने इस बात का भी जिक्र किया कि बसों की सूची तैयार कर इसे उत्तर प्रदेश की सरकार को भेज दिया गया.
आज की तारीख तक बस ऑपरेटरों को 4.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है. लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रवासी मजदूरों को ढोने के लिए बसों के मुद्दे पर विपक्षी कांग्रेस पार्टी से एक बुरी राजनीति पर उतर आई, और अंतत: उसने बसों को राज्य में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी.