Friday , 3 April 2020

बाहर न भेजें बच्चों को, घर में दे उनका साथ- डा. आरपी सिंह

सोनभद्र : कोरोना का खतरा सबसे अधिक बुजुर्गों और बच्चों को है. उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. ऐसे में उनका खास ख्याल रखा जाना बहुत जरूरी है. एक ओर बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण व जागरूक होने के चलते बाहर का रुख कम कर रहे है लेकिन बच्चों से इस तरह की अपेक्षा करना थोड़ा मुश्किल है. बच्चों को घर में रोके रहने के लिए परिवार के सदस्यों को उनकी मदद करनी चाहिए. ऐसे माहौल में बच्चों के साथ कैसा करें माहौल, इसकी जानकारी दे रहे बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरपी सिंह..

बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उन्हें पोषण युक्त भोजन कराए, उनपर किसी भी तरह का दवाब न बनाए और न ही चिल्लाएं. घर में इस तरह का माहौल बनाए कि उनका मन घर में लगा रहे. ऐसे में बच्चों को घर में एक जगह इकट्ठा कर कहानियों का सिलसिला शुरू करें. पढ़ने की आदत डलवाए. जिस तरह घर के बड़े छोटों को कहानी किस्से सुनाया करते थे, अब इस परंपरा को फिर से शुरू करने की आवश्यकता है. जिससे घर के बड़ों और बच्चों दोनों को घर में रहने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है. मोबाइल लैपटाप से इतर बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ाने के लिए उनकी मदद करें. उनको आकर्षित करने के लिए रंगीन किताबों का सहयोग ले व परिवार के सदस्य खुद भी इसमें उनके भागीदार बने. लैपटाप मोबाइल आदि को एल्कोहल आधारित सेनेटाइजर से सेनेटाइज जरूर करें. साथ ही, यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग को खांसी जुकाम है तो बाकी सदस्यों को इनसे दूर रखे. इन बातों को रखे ध्यान .. -हाथों को साबुन और पानी से धोते रहें

-खासते और छीकते समय अपने नाक और मुंह को टिश्यू या रुमाल से ढकें

-चेहरे, आंख, नाक, मुंह को बार-बार न छुएं

-ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह न जाएं

-खांसी व जुखाम वाले मरीजों से तीन फुट की दूरी बनाएं रखें