Sunday , 23 February 2020
महादेवा महोत्सव में बुद्धवार को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने बाँधा समा

महादेवा महोत्सव में बुद्धवार को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने बाँधा समा

रामनगर, बाराबंकी.महादेवा महोत्सव में बुद्धवार को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में ख्याति प्राप्त कवि व कवयित्रियों के मुक्त कंठ से लयबद्ध निकलने वाले शब्दों के प्रवाह ने श्रोताओं को देर रात तक आनंदित किया. कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय विधायक शरद अवस्थी व एसडीएम आनंद वर्धन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की. लखनऊ से पधारी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ मालविका हरिओम ने माँ सरस्वती की वंदना,हमें ज्ञान का उपहार दे माँ, स्वरों में सत्य की  झनकार दे माँ, गीत से काव्य पाठ की शुरुआत की.इसके बाद उन्होंने,मुद्दत से हर गुलाब पर कांटों का है पहरा ,यह किसकी सियासत है चमन हो गया सहरा, गीत सुनाकर श्रोताओं को आनन्दित किया.जब उन्होंने हास्य व्यंग्य, हमसे क्या मतलब है यार, सुनाया तो श्रोताओं ने खूब तालियां बजायी. कवयित्री डॉ श्वेता श्रीवास्तव ‘मधुर’ ने पढ़ा, देख रही हूँ सबको चुपके चुपके मैं, सही कहूं तो तुमको चुपके चुपके मैं,गीत पर दर्शक खूब आनंदित हुए .इसके बाद विख्यात मिश्रा ने वीर रस में, या तो यह तिरंगे में लिपट कर आऊंगा मां, या तो यह तिरंगा सीमा पर लाहराऊँगा मां ‘ गीत को सुनाकर देशभक्ति का संचार भरा.कवयित्री सरला शर्मा ने पढ़ा, है जब तक श्वास रण में खूं की एक-एक बूंद देते हैं, वतन के वास्ते रण बाँकुरे रण गूंज देते हैं, गीत को श्रोताओं ने खूब पसंद किया. उसके बाद हास्य कवि बिहारी लाल अंबर ने अपनी कविता, वतन तेरा अम्बर घटने से पहले, सर कटा दूंगा झुकने से पहले, ख़ूब पसन्द  की गई. कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे कवि राम किशोर तिवारी ‘किशोर’ ने जब सुनाया ‘शिव अर्चन में गूंजे यही एक स्वर, लोधेश्वर लोधेश्वर लोधेश्वर लोधेश्वर, तो पूरा माहौल भक्ति भावना में डूब गया. फिर बारी आई वाहिद अली वाहिद की जिन्होंने ‘शब्द तुला है पास हमारे शक्ति समय भी हम तोलेंगे,दुनिया चुप रह जाये लेकिन गीत मेरे फिर भी बोलेंगे, पढ़कर खूब वाहवाही लूटी.फिर लोक गीतकार फारुख सरल ने अनोखा समा बांधा. उनकी कविता ‘बूंद बूंद से गहरा सागर बनता है ,ऊंचा पर्वत कण कण मिलकर बनता है’ काफी सराही गई. फिर हाथरस से पधारे पदम अलबेला ने खूब हंसाया.उनकी कविता,सज धज के गोरी चली लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की मिल गए आशाराम, गीत पर खूब तालियां बाजी. डॉ आलोक शुक्ला की कविता ‘ सबरी गीत जटायु को तुम अपना मीत बनाते ,पत्थर पर लिख राम राम को राम नाम तैराते’ सुनाकर श्रोताओं को भक्ति भावना में लीन कर दिया.इसके अलावा कवि शंभू शिखर,मनवीर मधुर, सविता श्रीवास्तव,  विकास बौखल आदि कवियों ने भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की. देर रात तक चले कवि सम्मेलन में दूर दूर से आये श्रोता आनंदित होकर गीतों को सुनते रहे.