Monday , 26 August 2019

रूस के लिए उपयोगी साबित होगें उत्तर प्रदेश के सौर संयंत्र: योगी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुदूर पूर्वी रूस के क्षेत्रों में सस्ती विद्युत आपूर्ति में राज्य के सौर प्रणाली संयंत्र कारगर साबित हो सकते हैं. रूस यात्रा पर गए 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल योगी ने कहा कि यूपी ऑफ-ग्रिड विकेन्द्रीकृत सौर प्रणाली संयंत्रों यथा सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर आरओ वाटर प्लांट, सोलर पावर पैक, सोलर मिनी-ग्रिड पावर प्लांट एवं सोलर हाई-मास्ट की स्थापना में अग्रणी है. रूस के क्षेत्रों में सस्ती विद्युत आपूर्ति में यूपी के ऑफ-ग्रिड विकेन्द्रीकृत सौर प्रणाली संयंत्र कारगर साबित हो सकते हैं. सुदूर पूर्व रूस में भारत-रूस सहयोग के संबंध में आयोजित कार्यक्रम में रूस के जबाइकल्सकी क्राई क्षेत्र और यूपी के मध्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर के तहत एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में लगभग 8 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों के विकास की व्यापक सम्भावनाएं मौजूद हैं, जो हम सभी के लिए निवेश के अवसर प्रदान करती हैं. भारत-रूस के 7 दशकों से प्रगाढ़ संबंध रहे हैं. आजादी के तुरंत बाद भारत की प्रगति में रूसी सहयोग का बड़ा हाथ रहा है. रक्षा, औद्योगिक और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत को रूस का भरपूर सहयोग मिला है. यह कहना गलत नहीं होगा कि रूस और भारत की मित्रता वर्ष-प्रतिवर्ष प्रगाढ़ होती गई है और दोनों देश एक-दूसरे के स्ट्रेटजिक पार्टनर के रूप में स्थापित हुए हैं. सीएम ने कहा कि पूरे देश की तरह उत्तर प्रदेश में भी इस सहयोग के अनेक उदाहरण मौजूद हैं. वर्ष 1968 में ओबरा और वर्ष 1971 में हरदुआगंज में सोवियत संघ के सहयोग से थर्मल पावर प्लांट का निर्माण किया गया. रूसी कंपनियों द्वारा टेहरी एवं कोटेश्वर हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लांट के निर्माण में सहयोग प्रदान किया गया. कृषि एवं कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और भारतीय कृषि अनुंसधान परिषद शीर्षस्थ शोध एवं विकास संस्थाएं भारत में स्थापित हैं. इनकी विशेषज्ञता एवं मार्गदर्शन, सुदूर पूर्वी रूस में कृषि चुनौतियों को दूर करने और कृषि के समेकित विकास की संभावनाओं के लिए रोड मैप तैयार करने में सहायक होगा.