Saturday , 11 July 2020

लखनऊ कूच कर रहे श्रमदानियों को पुलिस ने रोका

बांदा. बल्हरका गांव में श्रमदान से खोदे गए नालाध्नदी को ग्राम पंचायत और अधिकारियों के मनरेगा कार्य बता देने पर मुख्यमंत्री से शिकायत करने पैदल लखनऊ कूच कर रहे श्रमिकों को पुलिस और अफसरों ने घेर लिया. घंटों चली बहस और बातचीत के बाद अंततः जांच का भरोसा दिलाने पर मजदूरों ने फिलहाल कूच स्थगित कर दिया. सुबह भंवरपुर से श्रमिकों का जत्था पैदल लखनऊ के लिए कूच कर रहा था. इसमें महिलाएं भी थीं. इस पर सुबह ही नरैनी क्षेत्राधिकारी रोहित यादव, कोतवाली प्रभारी गिरेंद्र सिंह पुलिस फोर्स के साथ पहुंच गए और घेराबंदी कर मजदूरों को रोक दिया. नरैनी, कालिंजर, बिसंडा, अतर्रा आदि से भी फोर्स बुला ली. करतल चैकी प्रभारी अर्जुन सिंह, तहसीलदार सुशील कुमार सिंह, बीडीओ मनोज कुमार भी उपस्थित थे. श्रमिकों का कहना था कि लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी दास्तां बताएंगे. पिछले कई मनरेगा कार्यों की अब तक मजदूरी भी नहीं मिली है. प्रधान और सचिव पर बंदरबांट का आरोप लगाया. दोपहर में भंवरपुर पहुंचे प्रभारी जिला विकास अधिकारी कृष्ण करुणाकरण पांडेय ने श्रमिकों से बात की. श्रमिकों की पैरवी कर रहे विद्याधाम समिति के राजाभइया ने वार्ता की. श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि नाले की सफाई और खुदाई 52 लोगों ने श्रमदान से की थी. इसका पैसा मनरेगा से निकालकर बंदरबांट कर लिया गया. इस पर जिला विकास अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि जांच की जाएगी. जांच रिपोर्ट के बाद उचित कार्रवाई होगी. अंततरू अफसरों के आश्वासन और मान-मनौव्वल के बाद श्रमिकों ने फिलहाल लखनऊ यात्रा स्थगित कर दी.