Friday , 21 February 2020
सराही झील में तीन सौ घंटे गरजी जेसीबी, फुर्र हो गए पछी

सराही झील में तीन सौ घंटे गरजी जेसीबी, फुर्र हो गए पछी

  बाराबंकी: जिले के तहसील राम सनेहीघाट की जिस सराही झील की चर्चा गणतंत्र दिवस के मौके देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, उसकी हकीकत शायद उन्होंने अपनी सरकार के अफसरों से भी जानने की कोशिश नहीं की. मोदी जी ने कह दिया कि ग्रामीणों ने सराही झील का तटबंध श्रमदान से बनाया जिसके कारण उसमें पानी रूका और अब पछियों का कलरव गूंज रहा है. मोदी जी यह बात सही है कि सराही झील में तटबंध बना और पानी रूका लेकिन कलरव गूंज नहीं रहा. झील के बनाए गए तटबंध के पहले किनारे की तरफ एक तालाब में कुछ बन मुर्गी चप्पल छैया करती हैं. तीन- चार सारस हैं. बगुलों के साथ सुअर करीब एक सैकड़ा की संख्या में झील में गंदगी करते हैं.         जानिए कैसे फैलाया गया झूठ : सराही झील की झूठी खबर फैलाकर उसकी बदनामी कराने की कहनी मोदी जी के मन की बात से एकदम जुदा है.                   झील में 20 जून से 10 जुलाई 2019 तक करीब तीन सौ घंटा जेसीबी मशीन गरजी. प्रति घंटा आठ सौ रूपये की दर से जेसीबी का भुगतान हुआ. एक जेसीबी हैदरगढ़ से मंगाई गई व एक टिकैतनगर इलाके की थी. सबसे पहले सराही व बघौली गांव के मध्य उस नाले को बंद किया गया जिससे झील में बारिश के दौरान एकत्र होने वाला पानी बह कर घाघरा नहीं में पहुंचता था. इसके बाद मशीन से ही झील के किनारे से डेढ़ सौ मीटर दूर तटबंध बनाया गया. इससे झील दो हिस्सों में बंट गई. जेसीबी मशीनों के शोर से वहां जो पछी थे वह भी भाग गए.                              हद तो यह कि जेसीबी से मेडबंदी कराने के पीछे मनरेगा से स्टीमेट पास करा कर लाखों की हेराफेरी की योजना थी. भला हो तत्कालीन बीडीओ आदित्य तिवारी का जिन्होंने मंजूरी नहीं होने दी. जेसीबी के काम को मनरेगा से दर्शाकर पैसा रिलीज करने का दबाव एक तहसील स्तरीय अधिकारी ने भी बनाया फिर भी पैसा पास नहीं हुआ. सरकारी खजाना लुटने से बच गया.                               चंगुल में है दलित महिला प्रधान :  सराही ग्राम पंचायत की प्रधान सरपता पढ़ी लिखी नहीं हैं. प्रधान बनने के बाद हस्ताक्षर करना सीखा. उनके नाम पर प्रधानी गांव के सुशील कुमार सिंह करते हैं. सुशील कुमार सिंह का खुलकर कहना है कि तीन सौ घंटा जेसीबी चली. एसडीएम राम सनेहीघाट ने बीडीओ से कहकर झील की मेड बंदी का भुगतान कराने का आश्वासन दिया था पर एक रूपये का भी भुगतान नहीं हुआ. दो लाख 40 हजार रूपये अपने पास से भुगतान करना पड़ा. सुशील का कहना यह भी है कि झील का रकबा सराही गांव में 27 हेक्टेयर व बनगावां गांव में 15 हेक्टेयर आता है. बनगवां के प्रधान अनवारूल हक उर्फ छोट्टन ने कोई मदद नहीं की.                         हवा हवाई खबर ने मोदी को किया गुमराह : एक बार फिर एक बडे़ बैनर कहे जाने वाले अखबार की छोटी हरकत से मोदी जी के साथ पूरे देश की जनता गुमराह हुई. हद तो यह कि ये झूठ मोदी जी के मन में घर कर गया जो उनके मन की बात बनकर फैल गया. मोदी जी आप जांच करवा लीजिए. जिस अखबार की खबर के साथ छपी फोटो देख आप सब गुमराह हुए वह सराही झील की नहीं है. पर्यावरण प्रेमी एसडीएम राम सनेहीघाट राजीव शुक्ल जी अयोध्या (फैजाबाद) की तहसील सोहावल के एसडीएम रह चुके हैं. सोहावल तहसील में समदा झील है. वहां की फोटो उनसे लेकर अखबार में छाप दी गई ताकि लगे कि सराही झील में पछियों का कलरव गूंज रहा है. हद तो यह कि एक नहीं दो बार 18 व 25 जनवरी 2020 को सुंदर पछियों के समूह वाली फोटो छापी गई. यह फोटो व खबर देख अन्य अखबारों के रिपोर्टर जब पहुंचे तो हकीकत सामने आई. समाज सेवा से जुड़े महंत वी.पी दास का कहना है  यह उसी प्रकार की पुनरावृति है जिसकी खबर पढ़कर प्रदेश के सैकड़ों शिक्षा मित्र सदमें में मरे थे क्योंकि हाईकोर्ट का आदेश जारी हुए बिना ही खबर छाप दी थी कि शिक्षा मित्रों का समयोजन के साथ हाईकोर्ट ने उनका बीटीसी प्रशिक्षण भी रद्द कर दिया है. खबर छपने के एक हफ्ते बाद हाईकोर्ट का आदेश आया तो उसमें प्रशिक्षण रद्द होने के संबंध में एक शब्द भी नहीं लिखा था. शिक्षा मित्रों की मौत का जो सिलसिला खबर पढ़ कर शुरू हुआ था वह हाईकोर्ट का आदेश पढ़ कर बंद हुआ था. इस झूठी खबर के खिलाफ मैने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी. संयोगवश याचिका तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश  श्री वाईके चंद्र चूर्ण की अदालत में प्रस्तुत हुई. उन्होंने दूसरी बेंच गठित कर सुनवाई के आदेश इसलिए दिए थे कि यह शिक्षामित्रों का मामला उनके आदेश से संबंधित था. भारतीय प्रेस परिषद से जवाब मांगा था. चार साल हो गए जवाब नहीं दिया. सराही झील के मामले में भी वैसा ही 50 प्रतिशत से ज्यादा झूठी खबर का एेसा जाल बुना गया कि मोदी जी का मन भी उस जाल में फंस गया.                       किसी ने सच ही कहा है ‘ झूठ के पांव व पंख नहीं होते पर उड़ता बहुत है, लेकिन टिकता नहीं.