Thursday , 19 September 2019

सात राज्यों में घुसपैठ रोकेगा लखनऊ मेमोरा एयर स्टेशन

लखनऊ. ड्रोन हो, माइक्रो लाइट्स, हेलीकॉप्टर या फिर गुब्बारे ही क्यों न हों. मध्य कमान की वायु सीमा में प्रवेश करते ही तुरंत पकड़ में आ जाएंगे. इनकी तस्वीरें तत्काल मुख्यालय को मिल जाएंगी और जरूरत के मुताबिक घुसपैठ को रोकने के लिए एक्शन लिया जाएगा.
गत स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय वायु सेना ने मेमोरा में एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (आईएससीसीएस) को पूरी तरह ऑपरेशनल घोषित कर दिया है. इससे एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूती मिली है. यह एकीकृत वायु कमान एवं कंट्रोल प्रणाली का अपग्रेडेड वर्जन है, जो वायु रक्षा के सभी कार्यों को नई मजबूती देगा. यह नोड मध्य वायु कमान एवं देश के सात राज्यों की वायु सीमा का किसी भी प्रकार के अतिक्रमण से बचाव करने में सक्षम है.
यह सामरिक, परिचालन एवं युद्धनीति से संबंधित सभी अधिकारियों एवं वायुसैनिकों को सही समय पर सही निर्णय लेने में मददगार साबित होगा. मध्य वायु कमान सात राज्यों में फैली हुई है. इसके पूरे क्षेत्र में वायु रक्षा को यह सिस्टम बढ़ाएगा. वायु सेना स्टेशन मेमोरा में यह सिस्टम लगा है, जिसकी प्रणाली किसी भी हवाई खतरे जैसे शत्रुतापूर्ण विमानों, हेलीकाप्टरों, ड्रोन, माइक्रो लाइट्स, गुब्बारों से होने वाली घुसपैठ पर तत्काल एक्शन लेने में मदद करेगा.
भारतीय वायुसेना अब लखनऊ के मेमौरा वायुसेना स्टेशन से दुश्मन देशों के विमानों की घुसपैठ पर सीधी कार्रवाई कर सकेगी. पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के भारतीय क्षेत्र में घुसने, ड्रोन, माइक्रोलाइट विमान और गुब्बारे तक की सीधी तस्वीर अब वायुसेना अपने ऑपरेशनल रूम को दे सकेगी. मेमौरा वायुसेना स्टेशन के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आइएसीसीएस) को वायुसेना ने ऑपरेशनल कर दिया है. देश के सभी वायुसेना स्टेशन के रडारों से जुड़ा मेमौरा वायुसेना स्टेशन यह तय कर सकेगा कि देश में किस हिस्से से वायुसेना को जवाबी कार्रवाई करनी है. यह प्रणाली मल्टी ऑपरेशन करने में भी अहम भूमिका निभाएगी.देश की महत्वपूर्ण मध्य वायुकमान ने मेमौरा वायुसेना स्टेशन को वायुसेना के आइएसीसीएस के लिए चुना था. पिछले साल इस प्रणाली को लगाकर इसका परीक्षण शुरू किया गया था. वायुसेना ने परीक्षण के बाद इसकी तकनीक को अपग्रेड करते हुए इसे ऑपरेशनल कर दिया. अब मेमौरा का यह सिस्टम देश में वायुसेना के सभी रडार से जुड़ गया है. यह सिस्टम मिसाइल हमलों के दौरान भी कार्रवाई करने में सक्षम है. दरअसल, आइएसीसीएस को भारतीय वायुसेना में 2009 में शामिल किया गया था. मेमौरा वायुसेना स्टेशन में लगी इसकी उन्नत तकनीक को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. ने विकसित किया है.जानकारों के मुताबिक अब मेमौरा वायुसेना स्टेशन से यह तय किया सकेगा कि देश के भीतर आए दूसरे देश के विमान को कहां से और कौन-सा भारतीय विमान भगाने की कार्रवाई करेगा. यह सिस्टम मिसाइल को भी कारगर तरीके से संचालित करने में सक्षम है. इससे निर्धारित लक्ष्य को भेदने में मदद मिलेगी. वायुसेना के साथ देश के सभी एयरपोर्ट के रडार भी इस प्रणाली से नियंत्रित होंगे.