Friday , 5 June 2020

सीएचसी पर दिखा डाक्टरों का अमानवीय चेहरा

मलिहाबाद, लखनऊ. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक बार फिर भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले डाक्टरों का अमानवीय चेहरा सामने आया. जहां घायल युवक कराहता रहा लेकिन डाक्टरों ने इलाज करना तो दूर देखना भी मुनासिब नही समझा. यह देख घायल का पिता ही डाक्टर बनकर अपने पुत्र का इलाज करने लगा. एम्बुलेंस न आता देख एक प्राईवेट गाड़ी से वह अपने पुत्र को ले जाकर एक निजी अस्पताल मे भर्ती कराकर इलाज करा रहा है.
कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का खौफ डाक्टरों मे इतना व्याप्त हो गया है कि वह गम्भीर बीमारों व घायलों का इलाज करने से भी कतरा रहे हैं. माल थाना क्षेत्र के ग्राम नबीपनाह निवासी श्रीपाल का पुत्र रवी (26) अपनी ससुराल मलिहाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर बस्ती आया था. जहां से यह मोटरसाइकिल से अपने साले अरून (20) के साथ दवा लेने के लिये ग्राम पहाड़पुर गया था. वापस आते समय इसकी मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर ग्राम पहाड़पुर पुलिया के निकट फिसल गयी. जिससे दोनों को गम्भीर चोटें आयीं.  सूचना पर पहुंची 102 एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया. जहां पर डाक्टरों व अन्य स्टाफ द्वारा इन घायलों को एम्बुलेंस से करीब 10 मिनट तक उतारा नहीं गया. उसके बाद परिजनों ने किसी तरह उन्हें उतार स्ट्रेचर पर डाला. डाक्टरों को सूचना देकर इलाज करने की बात कहते रहे. लेकिन वहां मौजूद डाक्टर व अन्य स्टाफ कोरोना वायरस के भय से उसे छूने तक नहीं गये. रवी का पिता श्रीपाल डाक्टरों से काफी मिन्नतें करता रहा. काफी देर बाद फार्मेसिस्ट प्रदीप यादव व वार्ड ब्वाय संदीप बाहर ही स्ट्रेचर पर पडे रवी को देख वापस चले गये. इसके बाद रवी का पिता अपने पुत्र का दर्द नही देख सका तो उसने खुद ही अपने पुत्र की मरहम पट्टी करने के साथ वीगो लगा इलाज करना शुरू कर दिया. अधीक्षक सहित डाक्टर व अन्य स्टाफ अपने एसी कमरों मे बैठे रहे. परिजनों ने 108 एम्बुलेंस को सूचना दी. लेकिन करीब आधा घण्टें बाद तक जब एम्बुलेंस नही आयी तो रवी के बेबस पिता
श्रीपाल ने एक निजी गाड़ी बुलाकर उसे प्राईवेट अस्पताल न्यू बाला जी मे भर्ती कराया. जहां उसका इलाज चल रहा है. जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुयी है.

पूर्व मे भी सीएचसी के डाक्टरों का दिखा है अमानवीय चेहरा

गत 15 मई को नगर पंचायत के मोहल्ला सैयदबाड़ा बजरिया निवासी नसीम उर्फ दादू ने अपने हांथों व गले की गर्दन ब्लेड़ से काट ली थी. जिसे पुलिस ने ई रिक्सा से ले जाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लायी थी. जहां डाक्टरों ने उसे इमरजेंसी वार्ड मे भर्ती करना तो दूर ई रिक्शे पर ही इलाज करना
शुरू कर दिया था. जिसमें भी डाक्टरों की लापरवाही उजागर हुयी थी.