Monday , 10 December 2018
इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर विकारों से मुक्त अवस्था ब्रह्मचर्य : डॉ. अभय जैन

इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर विकारों से मुक्त अवस्था ब्रह्मचर्य : डॉ. अभय जैन

लखनऊ, 23 सितम्बर (उदयपुर किरण). राजधानी के जैन मन्दिरों में चल रहे दशलक्षण पर्व के दसवें व अन्तिम दिन रविवार को जैन अनुयाइयों ने ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की. सभी मन्दिरों में भोर में तीर्थंकरों भगवन्तों का अभिषेक एवं शान्तिधारा की गई. नित्य नियम पूजन के साथ सोलहकारण एवं दशलक्षण धर्म का सामूहिक पूजन किया गया.

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को समझाते हुए डॉ. अभय कुमार जैन ने कहा कि दस धर्मो का सार उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है. समस्त इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर सभी विकारों से मुक्त अवस्था ही ब्रह्मचर्य है, मोक्ष है. व्यवाहरिक जीवन में व्यभिचार से सदाचार की ओर ले जाने वाले धर्म का नाम ब्रह्मचर्य धर्म है. दस धर्मों के सत्य ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है, तभी हम विकार रहित समाज की स्थापना कर राष्ट्र निर्माण में सहयोग प्रदान करनें में समर्थ होगें.

अनन्तचतु्र्दशी व्रत में तीर्थंकर अनन्तनाथ का पूजन अनुष्ठान के साथ भक्तों ने भक्ति भाव से नाचते-गाते और झूमते भक्ति की. आज ही के दिन 12 वें तीर्थंकर वासुपूज्य भगवान का मोक्ष प्राप्त होने क उपलक्ष में श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाड्डू चढ़ाया.
आशियाना जैन मन्दिर में शान्तिधारा करने का सौभाग्य संस्थापक अध्यक्ष नरेश कुमार जैन को मिला. प्रथम कलश डॉ. अभय जैन एवं द्वितीय कलश बृजेश जैन, बन्टी ने चढ़ाया. वासुपूज्य भगवान का निर्वाण लाड्डू चढ़ाने का पुण्य आशा एवं कुसुम जैन को मिला. अनन्तचतु्र्दशी पर अपराह्न भगवान अनन्तनाथ का अभिषेक एवं पूजन हुआ.

Source : http://udaipurkiran.in/hindi/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*