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धरियावद में जिस दल का विधायक, उसी दल की प्रदेश में बनती है सरकार

धरियावद में जिस दल का विधायक, उसी दल की प्रदेश में बनती है सरकार

प्रतापगढ़, 13 नवम्बर (उदयपुर किरण). प्रतापगढ़ जिले में शामिल धरियावद कभी उदयपुर जिले का हिस्सा होता था. जनजाति वर्ग लिए आरक्षित ये विधानसभा सीट आज विख्यात सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य एव किसानों के वरदान कहे जाने वाले जाखम डेम के लिए मशहूर हैं. भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद यहां भी सियासी पारा अब उबाल पर है. भाजपा ये यहां से वर्तमान विधायक गौतमलाल मीणा पर फिर से अपना भरोसा जताया है. वहीं कांग्रेस की ओर से अभी उम्मीदवार की घोषणा का इन्तजार है.

देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए सीतामाता अभयारण्य में पाई जाने वाली उड़न गिलहरी आकर्षण का प्रमुख हिस्सा हैं, जो कि भारत के इसी जंगल मे पाई जाती हैं. लखेश्वर महुमहादेव, आवरीमाता मन्दिर, रघुनाथ मन्दिर, महु स्थित जैन मंदिर यहां है. धरियावद गाडरी समाज द्वारा होली पर्व पर किए जाने वाला मनमोहक गैर नृत्य देशभर में प्रसिद्ध हैं, जिसे देखने विदेशी सैलानी भी यहां आते हैं जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के इस इलाके ने नौ वर्ष पहले उदयपुर जिले से प्रतापगढ जिले में विस्थापित होकर धरियावद विधानसभा क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान कायम की. जिला मुख्यालय प्रतापगढ से 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित धरियावाद का काफी विस्तार हो चुका है. धरियावद उपखण्ड मुख्यालय के अंतर्गत 38 ग्राम पंचायते हैं और करीब 400 छोटे बड़े गांव हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 2 लाख,44 हजार 421 है, जिसमें 73 प्रतिशत मतदाता जनजाति वर्ग के है.

यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, जैन, मुस्लिम जातियों का भी काफी वर्चस्व हैं.यह विधानसभा क्षेत्र आरक्षित हैं. इस विधानसभा सीट की एक और बड़ी महत्वपूर्ण खासियत हैं इस विधानसभा क्षेत्र से जीता कोई भी विधायक विपक्ष में नही बैठा. या यूं कहें जिस किसी पार्टी का विधायक जीता प्रदेश में सरकार उसी दल की बनी. वर्तमान विधायक गौतमलाल मीणा की इलाके में मजबूत पकड़ हैं. उदयपुर जिले के लसाड़िया में रहने वाले मीणा पूर्व में भी विधायक पद पर रह चुके है. क्षेत्र के शिक्षित विधायक गौतमलाल मीणा की राजनीतिक सफर की शुरुआत धरियावाद पंचायत समिति के प्रधान के रूप में हुई.

गौतमलाल मीणा की एक बार जीत और एक बार इसी सीट पर हार भी हो चुकी है. मीणा ने पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के नगराज मीणा को करीब सात हजार मतों के अंतर से शिकस्त देकर जीत हासिल की. उसी समय भाजपा से बगावत कर पूर्व विधायक नारायण लाल मीणा भी निर्दलीय चुनाव लड़े और करीब 18000 वोट प्राप्त किए. इसी विधानसभा चुनाव में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने भी क्षेत्र में अपना दमखम दिखाते हुए राजपा के प्रत्याशी केशुलाल मीणा को मैदान में उतारा, जिससे भाजपा और कांग्रेस का चुनावी समीकरण बिगाड़ा. क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओ को भी आलाकमान से जल्द विधायक उम्मीदवार की घोषणा की उम्मीद हैं. मंगलवार को कांग्रेस की पहली सूची जारी होने पर स्थित साफ़ हो सकती है. उसके बाद ही कांग्रेस की स्थिति का आंकलन सम्भव हो पाएगा कि पार्टी एक जुट होकर चुनाव लड़ पाएगी या आपसी- खींचतान के चलते विपक्ष को मजबूती मिलेगी. यदि गौतमलाल मीणा विधानसभा चुनाव 2019 जीतते है तो केबिनेट में इनका मंत्री बनाना भी लगभग तय माना जाता हैं. धरियावद विधानसभा क्षेत्र से विधायक सत्ता में तो रहे, लेकिन अब तक कोई भी मंत्री पद पर नही रहा है.

फिलहाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के गौतमलाल और कांग्रेस के नगराज के बीच ही मुख्य मुकाबला लगभग तय माना जा रहा हैं. विधायक गौतमलाल मीणा का दावा है की ने अपने कार्यकाल में उन्होंने सम्पूर्ण विधानसभा क्षेत्र में भरपूर विकास कार्य करवाया हैं जिसके अंतर्गत लसाड़िया में पंचायत समिति, तहसील, धारियावद क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालय,कई बड़ी नदियों पर हजारों करोड़ की लागत से पुल निर्माण कर सड़क, शिक्षा,चिकित्सा सहित कई बड़े काम हुए है जिसका फ़ायदा निश्चित रूप से चुनाव में उनको मिलेगा.दरियाबाद अर्थात दरिया से आबाद (नदियों) के संगम से विदित धारियावद की जाखम, खुखली एंव कर्मोचनी नदी सिंचाई के लिए प्रमुख है. आदिवासी इलाके के लोगों की मुख्य आजीविका कृषि पर निर्भर है. यहाँ गेंहू, मक्का,सोयबीन की मुख्य पैदावार हैं.

क्षेत्र में विगत कई सालों से कृषि उपज मंडी, नगरपालिका, स्टेडियम, सुलभ कम्प्लेक्स, स्थाई बस स्टैंड जिला मुख्यालय तक डबल सड़क, विद्यालय में शिक्षक, महिला चिकित्सक,सार्वजनिक पार्क,सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य को नेशनल पार्क की मान्यता दिलवाने की प्रमुख मांग लम्बे समय से चली आ रही हैं. दोनों राजनीतिक दलों ने इन सभी मुद्दों को पूर्ण करने के आश्वाशन पर चुनाव लड़े और जीते भी लेकिन आमजन की यह प्रमुख मांगे पूरी नही हो पाई जिसके चलते मतदाताओ में भी रोष हैं.

विरोधियो की ओर से विधायक गौतमलाल पर आरोप लगाए जाते रहे है कि विधायक ने क्षेत्र के गरीब किसानों से कृषि उपज मंडी खुलवाने का वादा किया था, लेकिन पांच साल बीत जाने की बाद भी गरीब किसानों को अपनी फसल ओने- पौने दाम में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता हैं. इसी के साथ धरियावद को नगर पालिका बनाने के नाम पर मुख्यमंत्री राजे ने आश्वाशन दिया था, लेकिन वह भी नहीं बन पाई. क्षेत्र में बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है जिसके चलते लोग रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं. वही जनजाति बहुल इस क्षेत्र में खेल सुविधाओं का अभाव है. यहां के कई खिलाड़ी कबड्डी, खो खो, तीरंदाजी खेलों की प्रतिभाओं ने देश व प्रदेश में अपना नाम कमाया हैं, स्टेडियम की प्रमुख मांग अब तक लम्बित हैं.

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