Thursday , 23 May 2019
मतुआ समुदाय के दो शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर 2 सप्ताह की रोक

मतुआ समुदाय के दो शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर 2 सप्ताह की रोक

कोलकाता, 14 मार्च (उदयपुर किरण). कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कथित जालसाजी के एक मामले में आरोपित मतुआ महासंघ के ठाकुर परिवार से आने वाले दो भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी पर दो सप्ताह का प्रतिबंध लगा दिया है. गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति मनोजीत मंडल की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया है. खंडपीठ ने कहा है कि मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी लेकिन पुलिस को अगले दो सप्ताह तक ठाकुरों को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए.

भाजपा नेताओं, शांतनु ठाकुर और उनके पिता और तृणमूल के पूर्व मंत्री मंजुल कृष्ण ठाकुर ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था. 2018 के शुरुआत में मंजुल कृष्ण ठाकुर भाजपा में शामिल हो गए थे. मिली जानकारी के मुताबिक तृणमूल सांसद ममताबाला ठाकुर, जो शांतनु की चाची और मंजुल के बड़े भाई की विधवा हैं, ने 11 फरवरी को दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया था कि दोनों ने दिवंगत मतुआ महासंघ की प्रमुख विनापाणि देवी उर्फ ​​बड़ो मां फर्जी के हस्ताक्षर किए थे.

शांतनु ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कथित रूप से बड़ोमां द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र ईमेल से भेजा था जिसमें दावा किया गया था कि बड़ो मां चाहती हैं कि तृणमूल को नरेंद्र मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 को पास कराने मे मदद करनी चाहिए इससे समुदाय के लोगों को जल्द नागरिकता मिलेगी. लेकिन ममताबाला का कहना है कि शांतनु और उनके पिता ने राजनीतिक लाभ के लिए बड़ों मां के हस्ताक्षर को कॉपी किया था. उसके शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, गायघाटा पुलिस स्टेशन ने दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 (व्यक्ति), 465 (झूठे दस्तावेज), 468 (जालसाजी), और 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की. इनमें से अधिकांश खंड प्रकृति में गैर-जमानती हैं. इसके बाद लोकसभा चुनाव से पहले गिरफ्तारी की आशंका के चलते, पिता-पुत्र ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था.


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