Thursday , 18 April 2019
WORLD HEMOPHILIA DAY : क्या है जानलेवा बीमारी हीमोफीलिया… जानें इसके बारे में यहां..

WORLD HEMOPHILIA DAY : क्या है जानलेवा बीमारी हीमोफीलिया… जानें इसके बारे में यहां..

World Homeophilia Day Today

किसी कारण से चोट लगना या खून बहना आम बात होती है. कभी खेलते समय तो कभी काम करते हुए हाथ या पैर कट जाने पर खून आने लगता है. कुछ समय बाद यह खून का थक्का या क्लॉट बनकर रूक जाता है.

अगर आपको पता चले कि कुछ मरीजों के चोट लगने के बाद खून निकलना बंद नहीं होता तो आपको भी हैरानी होगी. एक बीमारी ऐसा भी होता है. इस बीमारी का नाम है हीमोफीलिया. इस बीमारी में लगातार खून निकलता है, इससे जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता. मगर इलाज और सावधानी बरत कर इसे कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे में जान जाने का जोखिम भी कम हो सकता है.

रॉयल ब्रिटिश डिजीज भी नाम

हीमोफीलिया को ब्रिटिश डिजीज के नाम से भी जाना जाता है. यह एक आनुवांशिक बीमारी है. माना जाता है कि 10 हजार व्यक्तियों में से एक व्यक्ति को ये बीमारी होती है. पुरूषों में ये बीमारी ज्यादा पाई जाती है.

1989 में हुआ शुरू

इस जानलेवा बीमारी को लेकर 1989 से जागरूकता फैलानी शुरू की गई. तब से हर साल वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हेमोफीलिया के संस्थापक फ्रैंक कैनेबल के जन्मदिन पर हेमोफीलिया डे मनाया जाता है. यह संगठन मरीजों के जीवन को बेहतर बनाने का काम करता है.

ये हैं बीमारी के लक्षण

  • चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना
  • शरीर के किसी भी हिस्से पर बार बार नीले निशान या चकत्ते पड़ना
  • शरीर में सूजन होने पर गर्माहट महसूस होना
  • बच्चों के मसूढ़ों और जीभ में चोट लगना, लगातार खून का बहना
  • शरीर के जोड़ों, घुटनों. एड़ी, कोहनी में सूजन होना

इन वजहों से होता है हीमोफीलिया

  • यह बीमारी कुछ खास कारणों से होता है. इसका मुख्य कारण खून में एक प्रोटीन की कमी का होना है. इसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है.
  • क्लॉटिंग फैक्टर ही बहते खून का थक्का जमाता है. इससे ही खून का लगातार बहना बंद होता है. थ्राम्बोप्लास्टिन नाम के इस पदार्थ की कमी से यह बीमारी होती है.
  • थ्राम्बोप्लास्टिन बहते खून को थक्के में बदलता है. इस पदार्थ के खून में न होने से थक्के नहीं जमते. खून बहना बंद नहीं होता.
  • आमतौर पर इस बीमारी का असर पुरुषों पर होता है. इस बीमारी से 80 फीसदी पुरुष पीड़ित होते हैं.


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