Tuesday , 21 May 2019
भ्रष्टाचारी थानाध्यक्ष और हेड कांस्टेबल की तलाश जारी

भ्रष्टाचारी थानाध्यक्ष और हेड कांस्टेबल की तलाश जारी

जोधपुर. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम द्वारा पांच दिन पहले 20 हजार की रिश्वत लेते पकड़े गए एसआई गजेन्द्र सिंह को जेल भिजवाने के बाद अब बासनी थानाधिकारी संजय बोथरा और हेड कांस्टेबल तेजाराम की तलाश तेज कर दी गई है.

दोनों पांच दिन से गायब हैं. उनका अभी तक पता नहीं लग पाया है. पुलिस हेड कांस्टेबल की संपत्ति की जांच कर रही है. उसे करोड़ों की संपत्ति का मालिक बताया जा रहा है. एसीबी सूत्रों के अनुसार प्रकरण में पुलिस निरीक्षक संजय बोथरा की संदिग्ध भूमिका है जबकि हेड कांस्टेबल तेजाराम द्वारा पचास हजार रुपये रिश्वत के रूप में मांगने की पुष्टि हो चुकी है.

उधर, एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रकरण की जांच ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल सिंह लखावत को दे दी गई है. मामले की पत्रावली उन्हें सौंप दी गई है. कुछ दिन पहले एसीबी ने बासनी पुलिस थाना में एसआई गजेन्द्र सिंह को बीस हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था.

उसने यह राशि बजरी का अवैध परिवहन करते पकड़े गए एक डंपर को छोड़ने की एवज में ली थी. इसके बाद एसीबी ने थाने में पुलिस और बजरी माफिया के बीच चल रहे गठजोड़ का पर्दाफाश किया था. एसीबी थानाधिकारी बोथरा और हेड कांस्टेबल तेजाराम से पूछताछ करती, उससे पहले वह भूमिगत हो गए.

अवैध वसूली का बताया दबाव-

पूछताछ के दौरान एसआई गजेन्द्र सिंह ने एसीबी के सामने कई राज खोले हैं. उसका आरोप है कि कुड़ी भगतासनी थाने से बासनी थाने में स्थानान्तरण के बाद थानाधिकारी संजय बोथरा ने अवैध वसूली के लिए उस पर दबाव डालना शुरू कर दिया था.

वह वर्ष 2014 बैच का उप निरीक्षक है, इसलिए वह दबाव में आ गया. दबाव डालने को थानाधिकारी ने उसे दो बार ऑफिस रिपोर्ट (ओआर) में उच्चाधिकारी के सामने पेश कराया. तीन-चार बार उसके खिलाफ रिपोर्ट लगा दी थी, ताकि वो उसके हिसाब से काम करे.

संपत्ति की जांच में करोड़ों के मालिक 

एसीबी ने थानाधिकारी बोथरा व हेड कांस्टेबल तेजाराम की सम्पत्तियों की जांच और दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं. ब्यूरो का कहना है कि सांगरिया के राम नगर में हेड कांस्टेबल तेजाराम का तीन मंजिला मकान है.

इसके अलावा उसके पास गंगाणा गांव में फार्म हाउस, चार डम्पर व धवा गांव में बिल्डिंग मटेरियल की दुकान होने का भी पता लगा है. यह दुकान 12 दिसम्बर 2015 में शुरू की गई थी. पुलिस का कहना है कि ये डम्पर बजरी के अवैध परिवहन में शामिल हो सकते हैं. सम्पत्ति के दस्तावेज जुटाने की कोशिश की जा रही है.

बजरी माफिया पर नकेल के पुलिस की टीम

पुलिस आयुक्तालय की तरफ से बजरी माफिया की धरपकड़ के लिए पुलिस की स्पेशल टीम को लगाया गया है. इसमें एएसपी स्तर से लेकर चार निरीक्षकों को शामिल किया गया है. सात उच्चाधिकारियों के साथ पुलिस के जवानों को भी लगाया गया है. अफसर इस पर बराबर मॉनिटरिंग कर रहेे हैं.

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