Thursday , 23 May 2019
आॅटो सेल्ज में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं

आॅटो सेल्ज में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं

नई दिल्ली.ऑटोमोबाइल सैक्टर में पिछले 8 साल में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अप्रैल 2019 में ऑटोमोबाइल की बिक्री 16 प्रतिशत तक ज्यादा गिर गई है. ऑटो सैक्टर के विशेषज्ञों को अंदेशा है कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो भविष्य में जॉब संकट पैदा हो सकता है. फिलहाल अभी ऐसे हालात पैदा नहीं हुए हैं लेकिन यदि गिरावट का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहता है तो ऐसे हालातों का सामना करना पड़ सकता है. उम्मीद जताई जा रही है कि नई सरकार के आने के बाद स्थिरता आएगी, गिरावट कम होगी. अप्रैल 2019 में पैसेंजर वाहनों की बिक्री 17.07 प्रतिशत घट कर 2,47,541 यूनिट ही रह गई है जबकि पिछले साल अप्रैल में 2,98,504 वाहनों की बिक्री हुई थी. एस.यू.वी. सैगमैंट में भी 7 प्रतिशत की गिरावट हुई है. यात्री वाहनों की बिक्री में गिरावट का यह सिलसिला 3 महीने से जारी है. मार्च 2019 में यात्री वाहनों की बिक्री लगभग 3 प्रतिशत और कार की बिक्री 6.87 प्रतिशत गिरी थी जबकि फरवरी 2019 में यात्री वाहनों की बिक्री में 1 प्रतिशत और कारों की बिक्री में 4.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.
इसके अलावा तिपहिया वाहनों की बिक्री में 7 प्रतिशत और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है. वहीं निर्यात भी घटा है और .05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है. अप्रैल, 2019 में मोटरसाइकिल की बिक्री 11.81 प्रतिशत घटकर 10,84,811 यूनिट रही जबकि पिछले साल अप्रैल, 2018 में यह संख्या 12,30,046 यूनिट की थी. वहीं अप्रैल 2019 में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री 16.36 फीसदी घटकर 16,38,388 यूनिट पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल 2018 में यह आंकड़ा 19,58,761 यूनिट था. कच्चे तेल की कीमतों और रुपए की कीमत में गिरावट के कारण सितम्बर के बाद से खुदरा ऑटो की बिक्री में गिरावट आई है. इसने ग्राहक की भावना को प्रभावित किया, जोकि आई.एल. एंड एफ.एस. (इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनैंशियल सॢवस) के दिवालियापन से और प्रभावित हुआ है जिसके कारण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एन.बी.एफ.सी.) के बीच तरलता (कैश) का संकट पैदा हो गया है. दीवाली के दौरान धीमी बिक्री के कारण ऑटो निर्माताओं ने जनवरी से उत्पादन में कटौती करना शुरू कर दिया. आम तौर पर आम चुनाव में बिक्री में गिरावट आती है क्योंकि ग्राहक बड़ी टिकट खरीदने से पहले परिणामों की प्रतीक्षा करते हैं. लीवरेज्ड (लाभदायक) फर्मों के संपर्क में आने के कारण कुछ म्यूचुअल फंडों द्वारा भुगतान में देरी ने खरीदारों को सतर्क कर दिया है.
डीलर अक्सर इन्वैंट्री और अन्य परिचालन खर्चों के लिए अल्पकालिक ऋण के लिए एन.बी.एफ.सी. पर निर्भर होते हैं. बढ़ते आविष्कारों के कारण व्यापारियों को अधिक धन की आवश्यकता थी लेकिन ऋणों का विस्तार करते समय एन.बी.एफ.सी. और बैंक अधिक सतर्क हो गए. उपभोक्ताओं के लिए फाइनांस की उपलब्धता में गिरावट आई क्योंकि इनमें से अधिकांश छाया बैंक जोखिम लेने के लिए अनिच्छुक थे और इससे ऑटो बिक्री प्रभावित हुई. ग्रामीण बाजारों में कुछ एन.बी.एफ.सी. उन ग्राहकों को फंड देते थे जिनकी बैंक ऋणों तक पहुंच नहीं थी. इस प्रकार, एन.बी.एफ.सी. के साथ फंडों की कमी और ऋण मानदंडों के कड़े होने से बिक्री में मौजूदा मंदी आई है. वित्त वर्ष 2019 में मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड की कुल बिक्री में केवल 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 5 वर्षों में सबसे कम है. अप्रैल में ऑटोमोबाइल की बिक्री 8 साल के निचले स्तर पर 15.9 प्रतिशत तक गिर गई.
अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ऑटो की बिक्री में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है. 2018 में चीन में वाहनों की बिक्री दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार में 2.8 प्रतिशत गिरी, जो साल की शुरूआत में 3 प्रतिशत की वृद्धि के प्रक्षेपण के मुकाबले थी. अढ़ाई दशक में चीनी बाजार में यह पहली गिरावट थी. अमरीका में कारों और हल्के ट्रकों की बिक्री उसी अवधि के दौरान 0.6 प्रतिशत बढ़ी. यूरोपीय संघ में बिक्री 0.04 प्रतिशत गिरी. जापान ने पिछले साल वाहन पंजीकरण में 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन में योगदान के संदर्भ में ऑटोमोबाइल को भारत में बड़े क्षेत्रों में से एक माना जाता है. ऑटोमोबाइल क्षेत्र में पिछले 5 महीनों से जारी गिरावट के परिणामस्वरूप मार्च में औद्योगिक गतिविधि का संकुचन -0.1 प्रतिशत हो गया. पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारत के की कुल सकल घरेलू उत्पाद(जी.डी.पी.) के विकास की धीमी गति ने भी ऑटोमोबाइल के साथ-साथ तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री में आई गिरावट में योगदान दिया है.

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