Thursday , 23 May 2019
ITR फाइल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, नहीं तो लग जाएगी बड़ी पेनाल्टी

ITR फाइल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, नहीं तो लग जाएगी बड़ी पेनाल्टी

नई दिल्‍ली. फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के लिए रिटर्न भरने का वक्‍त नजदीक आ रहा है. ऐसे में अपना रिटर्न फाइल का प्‍लान पहले ही आप बना लें. यदि आप रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं तो अपनी इनकम का ब्‍योरा सही-सही भरें.

दरअसल आपके द्वारा दी गई प्रत्‍येक जानकारी को इनकम टैक्‍स विभाग जांचता है. क्‍योंकि आपकी ओर से किए गए निवेश, बचत, खरीददारी आदि की बाकायदा रिपोर्ट इनकम टैक्स विभाग को मिलती है. ये जानकारी एनुअल इंफॉर्मेशन रिटर्न (एआईआर) के जरिए इनकम टैक्‍स विभाग को संबंधित वित्‍तीय संस्‍थान भेजता है.

क्‍या होता है एआईआर ?

एनुअल इंफॉर्मेशन रिटर्न (एआईआर) एक कारोबारी साल के दौरान हुए वित्‍तीय लेन-देन को वित्‍तीय संस्‍थानों को ही भरना होता है. एआईआर भरने की जिम्मेदारी उन संस्थाओं की होती है, जिनके जरिए आपने वित्तीय लेन-देन किया है. इन संस्‍थाओं की जिम्मेदारी ये भी होती है कि वह वित्तीय लेन-देन करने वाले व्यक्ति के पैन नंबर का उल्लेख करें. साथ ही उस व्यक्ति का पिन कोड सहित पूरा पता भी बताएं.

वित्‍तीय संस्‍थान इनकम टैक्‍स विभाग को भेजते हैं ये सूचनाएं

बचत खाते में 10 लाख से अधिक जमा करना

जब एक साल के दौरान किसी व्यक्ति के बचत खाते में 10 लाख रुपए या इससे अधिक जमा होता है, तो उस बैंक की जिम्मेदारी होती है कि वह इसकी सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को दे.

दो लाख रुपए से अधिक का बिल

यदि किसी व्‍यक्ति ने एक साल में 2 लाख रुपए से अधिक क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान किया है़, तो क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक या संबंधित कंपनी को इसकी जानकारी इनकम टैक्‍स विभाग को देनी होती है.

म्युचुअल फंड की दो लाख रुपए से अधिक की खरीददारी

किसी म्युचुअल फंड योजना में कोई व्‍यक्ति दो लाख रुपए या इससे अधिक का निवेश करता है, तो उस म्युचुअल फंड के ट्रस्टी या ट्रस्टी की ओर से उस म्युचुअल फंड के कामकाज का प्रबंधन करने वाले व्यक्ति को ये सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को देनी होती है.

बॉन्ड में 5 लाख रुपए से अधिक का निवेश

यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी या संस्था की ओर से जारी किए गए बॉन्ड या डिबेंचर में पांच लाख रुपए या इससे अधिक का निवेश करता है, तो उसकी सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को देने की जिम्मेदारी बॉन्ड या डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्था की होती है.

पब्लिक इश्यू में एक लाख से अधिक निवेश

अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी के एक लाख रुपए या इससे अधिक राशि के शेयर पब्लिक इश्यू या राइट्स इश्यू के जरिए खरीदता है, तो शेयर जारी करने वाली कंपनी का उत्तरदायित्व होता है कि वह अथॉरिटीज को इसकी जानकारी दे.

30 लाख से अधिक की संपत्ति की खरीद या बिक्री

अगर कोई व्यक्ति 30 लाख रुपए या इससे अधिक कीमत की अचल संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो रजिस्ट्रार/ सब-रजिस्ट्रार की यह जिम्मेदारी होती है कि वह इसकी सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को दे.

आरबीआई के बॉन्ड में 5 लाख से अधिक का निवेश

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए गए बॉन्ड में कोई व्यक्ति अगर किसी एक साल के दौरान पांच लाख रुपए या इससे अधिक का निवेश करता है, तो आरबीआई की तरफ से इस काम के लिए नियुक्त व्यक्ति को यह सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को देनी होती है.

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