Tuesday , 21 May 2019
ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स द्वारा डायबिटीज की दवा रेमोग्लिफ्लोजिन लॉन्च

ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स द्वारा डायबिटीज की दवा रेमोग्लिफ्लोजिन लॉन्च

उदयपुर. शोध पर आधारित वैश्विक एकीकृत दवा कंपनी, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लि. (ग्लेनमार्क) ने अपने बिल्कुल नए, पेटेंट संरक्षित और वैश्विक रूप से शोधित सोडियम ग्लूकोज को-ट्रांसपोर्टर (एसजीएलटी2) इन्हिबिटर रेरेमोग्लिफ्लोजिन टैबोनेट (रेमोग्लिफ्लोजिन) के लॉन्च की घोषणा की. ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स के अध्यक्ष, इंडिया $फॉर्मूलेशन्स, मिडल ईस्ट और अफ्रीका ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स के सुजेश वासुदेवन ने बताया कि दवा वयस्कों में टाइप-2 डायबिटीज के उपचार में काम आती है. ग्लेनमार्क दुनिया की पहली कंपनी है जिसने रेमोग्लिफ्लोजिन लॉन्च किया है और इस अभिनव दवा का उपयोग करने वाला पहला देश भारत है. ग्लेनमार्क ने भारत में रेमोग्लिफ्लोजिन को ब्रांड नाम रेमो और रेमोजेन के रूप में लॉन्च किया है. रेमोग्लिफ्लोजिन एकमात्र एसजीएलटी2 इन्हिबिटर है जो सक्रिय फार्मास्युटिकल इन्ग्रेडिएंट (एपीआई) से लेकर फॉर्मुलेशन तक भारत में ही निर्मित किया जाता है.

रेमोग्लिफ्लोजिन की कीमत 12.50 रुपये प्रति टैबलेट है जिसे दिन में दो बार लेना होता है. यह भारत में उपलब्ध एसजीएलटी2 इन्हिबिटर्स की तुलना में 50 प्रतिशत कम है. वर्तमान में, भारत में एसजीएलटी2 इन्हिबिटर की प्रतिदिन की चिकित्सा लागत लगभग 55 रुपये है, जबकि रेमोग्लिफ्लोजिन एसजीएलटी2 इन्हिबिटर्स पर डायबिटीज रोगियों के लिए प्रति वर्ष लगभग 11,000 रुपये की बचत प्रदान करता है. ग्लेनमार्क ने चरण-3 नैदानिक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद रेमोग्लिफ्लोजिनटैबोनेट 100 मिलीग्राम के लिए रेग्युलेटरी अनुमति प्राप्त की है. रेमोग्लिफ्लोजिन का विश्व स्तर पर 26 नैदानिक परीक्षणों में अध्ययन किया गया है, जिसमें विभिन्न जातीयताओं के लगभग 2,500 रोगी शामिल हैं.

रेमोग्लिफ्लोजिन की खोज और विकास जापानी फर्म किसेई फार्मास्युटिकल कंपनी लि. ने किया गया था और बाद में ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन पीएलसी और ग्लेनमार्क के सहयोगी बीएचवी फार्मा द्वारा विकसित किया गया. ग्लेनमार्क अपेक्षाकृत कम लागत पर नवीनतम उपचार विकल्पों तक भारत में डायबिटीज रोगियों की पहुंच बनाने में अग्रणी रहा है और रेमोग्लिफ्लोजिन के लॉन्च के साथ, कंपनी का उद्देश्य एसजीएलटी2 इन्हिबिटर्स तक रोगियों की पहुंच बढ़ाना है क्योंकि ये दवाएं प्रभावी डायबिटीज प्रबंधन के लिए लाभकारी साबित हुई हैं. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडेरेशंस डायबिटीज एटलस 2017 के अनुसार, भारत में लगभग 7 करोड़ 20 लाख वयस्कों के डायबिटीज से पीडि़त होने का अनुमान है.

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