Tuesday , 21 May 2019
आईपीएस राजीव कुमार की जमानत पर लगा ‘ग्रहण’

आईपीएस राजीव कुमार की जमानत पर लगा ‘ग्रहण’

कोलकाता, 17 मई (उदयपुर किरण). पश्चिम बंगाल सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक पद से हटाए गए राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रोक हटा ली है. सारदा चिटफंड घोटाले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित राजीव का सुप्रीम कवच हटने के बाद अब उनके सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है. हालांकि शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजीव खन्ना की खंडपीठ ने उन्हें एक सप्ताह का समय अग्रिम जमानत के लिए जरूर दिया है, लेकिन इस बीच उन्हें जमानत मिलेगी या नहीं इसे लेकर संशय की स्थिति है.

दरअसल उन्हें अपनी जमानत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील करनी होगी, लेकिन हाईकोर्ट के अधिवक्ता पिछले महीने हावड़ा कोर्ट में अधिवक्ताओं पर पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ आंदोलनरत हैं और कोर्ट में किसी तरह का काम नहीं कर रहे हैं. 20 मई तक अधिवक्ता किसी भी तरह का कोई काम अथवा किसी के लिए जमानत की अर्जी नहीं लगाएंगे. हालांकि हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रतीक तिवारी ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि इससे राजीव कुमार को बहुत अधिक समस्या नहीं होगी. वह खुद अपनी याचिका न्यायालय के समक्ष लगा सकते हैं अथवा सरकारी अधिवक्ता जो राज्य सरकार के लिए काम करते हैं वह अगर चाहे तो राजीव कुमार के लिए याचिका लगा सकते हैं. हालांकि वे सरकारी तौर पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत तौर पर याचिका लगाएंगे. राजीव कुमार भारतीय दंड विधान की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत की याचिका लगाएंगे. इसमें बहुत हद तक उन्हें अग्रिम जमानत मिलने की संभावना भी है.

सीबीआई राजीव कुमार से हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है, लेकिन सारदा मामले में अभी तक जितने भी चार्जशीट दाखिल हुए हैं अथवा प्राथमिकी दर्ज हुई है उसमें कहीं भी राजीव कुमार का नाम नहीं है. इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत मिलने में सहूलियत भी होगी.

अधिवक्ता तिवारी ने बताया कि अगर इस बीच जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई राजीव कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करती है और उसमें आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) लगाती है तब राजीव कुमार को जमानत मिलना मुश्किल हो जाएगा. यह गैर जमानती धारा है और इसमें आरोपित की गिरफ्तारी तय होती है.

इस मामले में सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई कानूनी सलाह ले रही है. न केवल राजीव बल्कि सारदा मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित चार आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ की व्यवस्था की जा रही है.

उल्लेखनीय है कि चुनावी हिंसा के कारण चुनाव आयोग ने राजीव कुमार को राज्य सीआईडी के एडीजी पद से हटाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय से संबद्ध कर दिया है. इस कारण यदि सीबीआई उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजती है तो वह पहले की तरह बहानेबाजी नहीं कर सकेंगे. उन्हें हाजिर होना ही होगा.

कानूनविदों का कहना है कि जिस जुनून के साथ सीबीआई ने राजीव कुमार की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी है उससे साफ है कि उनकी जान बख्शने वाली नहीं है.

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