Sunday , 21 July 2019

चंद्रयान-2 को 15 जुलाई सुबह लॉन्च किया जाएगा: इसरो चेयरमैन

बेंगलुरु/नई दिल्ली.चंद्रयान 2 पर 15 जुलाई को तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर अपनी उड़ान चंद्रमा के लिए भरेगा. इस बात की जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने दी है. इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन के वैज्ञानिक आखिरकार चांद पर भारत का दूसरा कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. चांद पर जाने को तैयार भारत का स्पेस मिशन चंद्रयान-2 के लॉन्च का ऐलान बेंगलुरु में इसरो के चेयरमैन डॉ. के सिवान कर दिया. उन्होंने बताया है कि 15 जुलाई को सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर चंद्रयान-2 को लॉन्च किया जाएगा. सिवान ने बेंगलुरु में इस मिशन से जुड़ी जानकारी के लिए वेबसाइट का लॉन्च भी किया. इसरो चेयरमैन ने जानकारी दी कि चंद्रयान-2 को 15 जुलाई सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाएगा. इसमें तीन हिस्से होंगे- लैंडर, रोवर और ऑर्बिटर. रोवर एक रोबॉटिक आर्टिकल है, जिसका वजन 27 किलो और लंबाई 1 मीटर है. लैंडर का वजन 1.4 टन और लंबाई 3.5 मीटर है. ऑर्बिटर का वजन 2.4 टन और लंबाई 2.5 मीटर है.
सिवान ने बताया कि लैंडर को ऑर्बिटर के ऊपर रखा जाएगा. लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर को एक साथ कंपोजिट बॉडी कहा गया है. इस कंपोजिट बॉडी को GSLV mk lll लॉन्च वीइकल के अंदर हीट शील्ड में रखा जाएगा. 15 जुलाई को लॉन्च के 15 मिनट बाद GSLV से कंपोजिट बॉडी को इजेक्ट कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रोपल्शन सिस्टम के जलने से कंपोजिट बॉडी चांद की ओर बढ़ने लगेगी. कुछ दिन बाद एक रेट्रो बर्न होने से यह चांद की कक्षा में पहुंच जाएगी. इसके बाद सही समय पर लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. लैंडर अपने प्रोपल्शन का इस्तेमाल कर चांद से 30 किमी दूर की कक्षा में करीब 4 दिन तक रहेगा. लैंडिंग वाले दिन लैंडर का प्रोपल्शन सिस्टम उसकी वेलॉसिटी को कम करेगा और लैंडर को चांद के साउथ पोल पर लैंड कराएगा. इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट का वक्त लगेगा.
इसरो चेयरमैन का कहना है कि इस मिशन का यह सबसे रोमांचक पल होगा, क्योंकि इसरो ने इससे पहले इस तरह की फ्लाइट को कभी अंजाम नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इसरो ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए रोमांच से भरा लम्हा होगा. चांद पर लैंड होने के बाद रोवर के लिए दरवाजे खुलेंगे और रोवर 1 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चांद की सतह पर पैर रखेगा. ऑर्बिटर इस दौरान चांद की कक्षा में घूमेगा, लैंडर अपनी जगह साउथ पोल पर ही रहेगा और रोवर चांद पर घूमेगा. डॉ. सिवान ने बताया कि इसरो का मिशन स्पेस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा और क्वॉलिटी ऑफ लाइफ को बेहतर बनाने के लिए करना है. उन्होंने बताया कि कैसे स्पेस टेक्नॉलजी ने चक्रवाती तूफान फोनी में या ब्रॉडबैंड सेवा दूरवर्ती इलाकों में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. अब वक्त है स्पेस साइंस पर ध्यान केंद्रित करने का है. इसके तहत दूसरे ग्रहों को एक्सप्लोर करने के मिशन पूरे किए जाएंगे जिनका फायदा आगे की पीढ़ियों को मिलेगा.

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