Tuesday , 18 June 2019

विश्व रक्तदान दिवस: देश में 30 लाख यूनिट खून की कमी

नई दिल्ली.आज पूरी दुनिया विश्व रक्तदान दिवस मना रही है. जिसका उद्देश्य लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना है. लेकिन, खून की कमी से अकेले भारत में ही हर साल लगभग 1.36 लाख महिलाओं की मौत हो जाती है. अमूमन लोगों में यह धारणा रहती है रक्तदान करने से कमजोरी होती है. इसलिए रक्तदान करने से लोग कुछ ज्यादा ही घबराते है. लेकिन यह नहीं सोचते कि जिस तरीके बूंद बूंद कर जल को बचाया जा सकता है ठीक उसी तरह से बूंद बूंद रक्त देकर किसी दूसरे लोगों की जान भी बचाई जा सकती है. जो पूरी दुनिया में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हुई मौतों का 25.7 फीसदी है. विश्व रक्तदान दिवस मानव विज्ञान में नोबल पुरस्कार पाए वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद मनाया जाता है. इन्हें मानव रक्त का वर्गीकरण करने का श्रेय जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहन देना एवं उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है.
इतना ही नहीं, नेशनल हेल्थ सर्विस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच साल में लगातार रक्तदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष रक्तदाताओं में 24.8 और महिला रक्तदाताओं में 6 फीसद की कमी हुई है. देश में हर साल लगभग 1.20 करोड़ यूनिट खून की जरूरत होती है. रक्तदाताओं से केवल 90 लाख यूनिट ही रक्त एकत्रित हो पाता है. जिससे हर साल 30 लाख यूनिट रक्त की कमी रह जाती है.
देश में तेजी से कम होते रक्तदाताओं का कारण रक्तदान को लेकर फैलीं कई तरह की अफवाहें हैं. सर्वे के अनुसार, शाकाहारी लोग यह मानते हैं कि उनके शरीर में आयरन की कमी होती है इसलिए वह रक्तदान नहीं कर सकते जबकि कई शाकाहारी खानों में आयरन भरपूर होता है. कई लोग यह मानते हैं कि शरीर पर टैटू बनवाने के बाद रक्तदान करना ठीक नहीं होता. जबकि मामला इसके ठीक उलट है. टैटू या पियर्सिंग करवाने के चार से पांच महीने बाद आसानी से रक्तदान किया जा सकता है. रक्तदान के दौरान कोई भी दाता जितना रक्त दान करता है शरीर उसकी आपूर्ति 24 घंटों के अंदर कर लेती है.

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