Tuesday , 18 June 2019

मांगो को लेकर बंगाल से अब दिल्ली तक पहुंची डॉक्टरो की हड़ताल, मरीज परेशान

नई दिल्ली.कोलकाता में डॉक्टरों की चल रही हड़ताल ने अब आक्रामक रुख अपना लिया है. कोलकाता डॉक्टरों को सीएम ममता की चेतावनी के बाद देश के डॉक्टर एक्शन मोड़ में आ गए है. कोलकाता से लेकर मुंबई और नई दिल्ली तक डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों को मुश्किल झेलनी पड़ रही है. पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों की हड़ताल के समर्थन में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने अखिल भारतीय विरोध दिवस घोषित किया है. दिल्ली मेडिकल असोसिएशन के अलावा पटना और रायपुर एम्स के डॉक्टर भी हड़ताल को समर्थन दे रहे हैं. ऐसे में देशभर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं. कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में दो जूनियर डॉक्टरों पर हमला होने के बाद पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टर मंगलवार से हड़ताल पर हैं.
दिल्ली– शुक्रवार को दिल्ली में डॉक्टरों ने ओपीडी के अलावा रूटीन सर्जरी के मामलों को न देखने का फैसला किया है. एम्स और सफदरजंग अस्पताल में नए मरीजों के ओपीडी में रजिस्ट्रेशन बंद है. हालांकि पुराने मरीजों का इलाज हो रहा है. दिल्ली मेडिकल असोसिएशन (डीएमए) के अध्यक्ष डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि केवल इमर्जेंसी सेवाएं ही चालू रहेंगी. राज्य में डीएमए से 18 हजार डॉक्टर जुड़े हुए हैं. डीएमए का कहना है कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा में शामिल लोगों पर ऐक्शन लेने के लिए एक कानून की जरूरत है जिसमें ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान हो. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि वह संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस मामले पर चर्चा करेंगे. आईएमए ने डॉक्टरों पर हमले रोकने के लिए एक सख्त सेंट्रल हॉस्पिटल प्रटेक्शन ऐक्ट बनाने की मांग की है.
पश्चिम बंगाल– पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का आज चौथा दिन है. हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने गुरुवार दोपहर दो बजे तक काम पर लौटने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अल्टिमेटम को नहीं माना. डॉक्टरों का कहना है मुख्यमंत्री ने जो कहा उन्हें उसकी उम्मीद नहीं थी और सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी. मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर बरसते हुए विपक्षी बीजेपी और सीपीएम पर उन्हें भड़काने और मामले को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया. डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तीसरे दिन भी आपातकालीन वॉर्ड, ओपीडी सेवाएं, पैथलॉजिकल इकाइयां बंद रहीं.
डॉक्टर कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद भीड़ द्वारा अपने दो सहकर्मियों पर हमले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने भी डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की. त्रिपाठी से भेंट के बाद राजभवन के बाहर एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, ‘मांग पूरी होने तक हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे. हमारी मांगे साधारण हैं… उचित सुरक्षा मिले और सभी अस्पताल में सशस्त्र पुलिस बल तैनात हों साथ ही एनआरएस अस्पताल में शनिवार को हुए हमले में शामिल अपराधियों को गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार किया जाए.
महाराष्ट्र– महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर्स (मर्द) आज पश्चिम बंगाल में हुई घटना के विरोध में हड़ताल करेंगे. उन्होंने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, हम आज अपनी ओपीडी, वार्ड और एकेडमिक सेवाएं सुबह आठ बजे से शाम के पांच बजे तक बंद रखेंगे. आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी.
डॉक्टरों पर बढ़ते हमले- 2013 और 2014 के दौरान उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एम्स में कार्यस्थल पर हिंसा के 32 मामले दर्ज किए गए. ज्यादातर मामलों में पहले हमले का शिकार नर्सें हुईं. यहां दो साल के दौरान नर्सों पर हमले के 16 और डॉक्टरों पर हमले के 8 मामले देखे गए. कैजुअल्टी वॉर्ड में सबसे ज्यादा 38 प्रतिशत मामले सामने आए. वहीं ओपीडी में 31 और वॉर्डों में 22 प्रतिशत हमले के मामले देखे गए. इनमें से ज्यादातर मामलों में कोई सजा नहीं हुई. 4 फीसदी मामलों में मौखिक चेतावनी देकर बात खत्म हो गई. 3 प्रतिशत मामलों में इलाज बंद किया गया. सिर्फ 2 प्रतिशत मामलों में पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई.

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