Sunday , 21 July 2019

शिक्षा विभाग व स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी

जोधपुर, 13 जुलाई (उदयपुर किरण). राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत सरदार चिल्ड्रंस सीनियर सैकेंडरी स्कूल में पढ़ रहे छात्र उवैश मलकानी और छात्रा ताजीम मलकानी को अचानक स्कूल बंदकर शिक्षा अर्जन से वंचित किए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए है.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, प्राथमिक शिक्षा निदेशालय राजस्थान के निदेशक, जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) जोधपुर और प्रधानाचार्य सरदार चिल्ड्रन्स सीनियर सैकेंडरी स्कूल जोधपुर को एक सप्ताह मेंं जवाब पेश करने का आदेश दिया है. छात्र व छात्रा की ओर से अधिवक्ता एमए सिद्दीकी व एडवोकेट आरिफ मलकानी ने पैरवी की.
दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 सितंबर 2014 को एक आदेश जारी कर जालोरी गेट ईदगाह के रहने वाले उवैश मलकानी व ताज़ीम मलकानी को अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत सरदार चिल्ड्रंस सीनियर सैकेंडरी स्कूल मेंं प्रवेश दिलवाया था. इन दोनों बच्चों को प्रवेश फार्म उपलब्ध नहीं करवाने पर 3 हजार रुपये की कोस्ट भी लगाई थी. वर्ष 2014 से पढ़ाई करते हुए बच्चों ने पिछले शिक्षा सत्र मेंं दूसरी कक्षा उत्तीर्ण की. उवैश व ताजीम के अभिभावकों इमरान व मोहसीन की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि सरदार चिल्ड्रन्स सीनियर सैकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य ने 27 फरवरी 2019 को अचानक नोटिस जारी कर उन्हें सूचित किया कि स्कूल का प्रबंधन संभालने वाली शिक्षण समिति श्री ओसवाल सिंह सभा के सचिव के आदेशानुसार सरदार चिल्ड्रंस सीनियर सैकेंडरी विद्यालय वित्तीय नुकसान मेंं चल रही है. इसके चलते अगले सत्र 2019-2020 से निरन्तर चलने मेंं असमर्थ है इसलिए किसी अन्य विद्यालय मेंं प्रवेश दिलाने की कार्यवाही प्रारंभ करावें.
हाईकोर्ट को बताया गया कि सरदार चिल्ड्रन्स सीनियर सैकेंडरी विद्यालय का प्रबन्धन संभालने वाली शिक्षण समिति श्री ओसवाल सिंह सभा ने स्कूल बंद करने के नियमों व शासन की स्थापित औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया और राज्य सरकार से प्राप्त मान्यता को जिला शिक्षा अधिकारी को सरेंडर किए बगैर अचानक स्कूल बंद कर दिया जो गैर कानूनी है. स्कूल के अध्ययनरत छात्र-छात्रओं के रिकार्ड्स किस अन्य स्कूल मेंं जमा करवाने है, उसकी अनुमति भी प्राप्त नहीं की, जो कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है. हाईकोर्ट ने संबन्धित पक्षों को एक सप्ताह मेंं जवाब पेश करने को कहा है.

 

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