Sunday , 2 April 2023

नक्सल आंदोलन के चेहरा रहे अजय कानू ने शुरू की राजनीतिक पारी

सोनम गुप्ता/पटना. कभी नक्सली आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे ‘अजय कानू’ ने ‘लोकहित अधिकार पार्टी ‘ का दामन थाम लिया. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘रौशन लाल गुप्ता’ ने उन्हें बिहार का कमान सौपा. फिलहाल तो अजय कानू संगठन को मजबूत करेंगे इसकी वजह न्यायिक अवरोध है.
संदेह नहीं  लोकहित अधिकार पार्टी ने जहाँ अजय कानू को आगे कर अपने लक्ष्य को तरीके से साधा है वहीं अजय कानू के लिए मुख्यधारा की राजनीत करने का सुनहरा अवसर मिला है. अपने संगठन का एरिया कामंडर रह चुके हैं कानू की धमक बिहार, झारखंड,पश्चिम बंगाल और उड़िसा तक रह चुका है. संगठन को कैसे खड़ा करना है और उससे परिणाम कैसे निकालना है, वो बाखूबी जानते हैं. कल के उनके सम्बोधन में ये स्पष्ट हो गया कि उनका विजन व्यापक है वो उस समाज के हक में भी सोच रहें हैं, जिनके लिए वो कभी खौफ के दुसरे नाम जाने जाते थे.
फिलहाल भारतीय राजनीत में दलित, अल्पसंख्यक और पिछडा जैसा शब्द किसी नवोदित पार्टी का तकियाकलाम है. अजय कानू ने अपने पहले संबोधन में ही स्पष्ट कर दिया कि उनके नजर में अगडे वर्ग के वो भी लोग हैं जो शोषित हैं और हासिये पर डाल दिये गये हैं. हम अपने पाठकों को बताते चलें 90 के दौर में बिहार जातिये संघर्ष का बड़ा केन्द्र हुआ करता था एक ओर शोषित, पिछडो को जहाँ गोलबंद कर माओवादी उनके हक की खूनी लड़ाई लड़ रहें थें वहीं दुसरी ओर भूमी और अपने वजूद बचाने के लिए भूमिपति प्राइवेट सेना बनाकर उसका प्रतिकार कर रहें थे. माओवादियों और रणवीर सेना के खुनी संग्राम ने बिहार के कल-करखानों को बंद कर दिया लोग पलायन को विवश हो गये.

नक्सल आंदोलन के चेहरा रहे अजय कानू ने शुरू की राजनीतिक पारी