Thursday , 19 September 2019

IIT दिल्ली: केले के रेशे से बने सैनिटरी नैपकिन, 120 बार हो सकेंगे इस्तेमाल

नई दिल्ली .आईआईटी दिल्ली से जुड़े एक स्टार्टअप ने पहली दफा 120 बार इस्तेमाल में लाए जा सकने वाले सैनिटरी नैपकिन की पेशकश की है. इस नैपकिन में खास बात यह है कि इसे केले के रेशे से बनाया गया है. यह 2 साल तक चल सकता है और इसे 120 बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है. आईआईटी दिल्ली के प्रफेसर्स की मदद से सैनफे द्वारा तैयार किए गए दो नैपकिन की कीमत 199 रुपये रखी गई है. टीम ने इस उत्पाद के लिए एक पेटेंट का आवेदन जमा कराया है.
स्टार्टअप के संस्थापकों में से एक अर्चित अग्रवाल ने बताया, अधिकांश सैनिटरी नैपकिन सिंथेटिक सामग्री और प्लास्टिक से बने होते हैं, जिन्हें सड़ने में 50-60 साल से ज्यादा वक्त लग सकते हैं. मासिक धर्म के समय इस्तेमाल किए जाने वाले इन नैपकीन को कूड़ेदान, खुले स्थान या और जल में फेंक दिया जाता है, जला दिया जाता है या मिट्टी में दबा दिया है या फिर शौचालयों में बहा दिया जाता है.
उन्होंने कहा, ये तरीके पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करती हैं. उदाहरण के लिए, जलने से डाइऑक्सिन के रूप में कार्सिनोजेनिक धुएं का उत्सर्जन होता है, जिससे वायु प्रदूषण का खतरा पैदा होता है. इस कचरे को लैंडफिल में डालने से केवल कचरे का बोझ बढ़ता है. अग्रवाल ने हैरी सेहरावत के साथ अपने स्टार्टअप की स्थापना उस समय की थी, जब वह आईआईटी दिल्ली में बीटेक कर रहे थे.