गाजेबाजे के साथ रजत रथ में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले भगवान ऋषभदेव
केसरियानाथ के जयकारों से गूंजा नगर
ऋषभदेव . नगर में चैत्र कृष्ण अष्टमी शनिवार को भगवान ऋषभदेव के जन्मोत्सव पर मेला लगा . भगवान के दर्शन के लिए आस पास के ग्रामीणों सहित गुजरात मध्यप्रदेश महाराष्ट्र कर्नाटक सहित भारत के कोने कोने से केसरियाजी भक्त उमड़ पडे . प्रभु के दीदार के लिए घंटों लाइन में खड़े रहे, भूख-प्यास की चिंता भी नहीं रही . बस भावों से भरे हृदय में एक नाम, भरोसा, आशा व उम्मीद थी दादा केशरिया . दर्शनों की कतार में लगे भक्त प्रभु के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे, वहीं सेवा में खड़े स्वयंसेवक जयकारों व तालियों से भक्तों में जोश भरते नजर आए. केसरियाजी आने वाले श्रद्धालु भंडारों में जहां अनेक व्यंजनों का आनन्द ले रहे थे, वहीं स्वयंसेवी संस्थाओं के सेवादार सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे. रजत रथ पर सवार होकर केशरियानाथ जब धुलेव के मुख्य बाजारो से गुजरे तो भक्त पलक पांवड़े बिछाए स्वागत में खड़े रहे.
नगर भ्रमण के लिए ऋषभदेव निज मंदिर से शाम चार बजे रथ पर सवार होकर केसरियानाथ की शोभायात्रा गाजेबाजे के साथ निकाली गई. शोभायात्रा के आगे पाल बिलख के लोग तथा भक्त नाचते चल रहे थे. पूरा नगर धूलेवा धणी केसरियानाथ के जयकारों से गुंजायमान हो गया. केसरियानाथ की सवारी शाही लवाजमे के साथ मंदिर से आरम्भ हुई. रथयात्रा के साथ हजारों केशरिया भक्त नाचते-गाते हुए साथ चल रहे थे. रथयात्रा के दर्शन करने के लिए गलियों, धर्मशालाओं की छतों पर धुलेवा भक्त खड़े नजर आए . रथ का दीदार पाने व प्रसाद लेने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही. रथयात्रा नगर के प्रमुख बाजार से होते हुए पगल्याजी पहुंची, जहां पर केसरियानाथ की पूजा-अर्चना व आरती की गई.
केसरियानाथ को रजत रथ में बिराजित कर निकाली शोभायात्रा :
ऋषभदेव निज मंदिर से शाम 4 बजे भगवान ऋषभदेव को रजत रथ में विराजित कर शोभायात्रा निकाली, जो निज मंदिर से ऋषभ चौक, जौहरी बाजार, सदर बाजार, नेहरू बाजार, पाटुना चौक, हॉस्पिटल रोड होती हुई पगल्याजी पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद रात 7.30 बजे पुनः मंदिर में आगमन हुआ . इससे पहले भगवान ऋषभदेव को 35 किग्रा सोने व हीरे जड़ित आंगी धारण करवाई गई और विशेष पूजा-अर्चना की गई . मंदिर से एक किमी दूर पगल्याजी पहुंचने में शोभायात्रा को ढाई घंटे लगे . पगल्याजी पर पूजा व अर्चना की गई .
जन्मकल्याण आरती व मंगल दीपक:
भगवान के जन्मोत्सव पर्व पर मुख्य कार्यक्रम शनिवार मध्यरात्रि 12.45 बजे भगवान ऋषभदेव की जन्मकल्याणक आरती एवं मंगल दर्शन हुए . रात 12 बजे से 12.40 तक मंदिर परिसर में भजनों की प्रस्तुतियां हुई एवं भक्तों ने जमकर भक्ति की . एवं जन्मकल्याणक आरती एवं मंगला दर्शन के साथ जन्मोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ .
भंडार धुलेव के जवानों की सलामी एवं गजर बजने के साथ शुरू हुए नित्य कार्यक्रम
प्रातः 6 बजे भंडार धुलेव के जवानों की सलामी के साथ मंदिर के पट खुले . गजर बजते ही केसरियानाथ , आदिनाथ भगवान, धुलेवा धणी तथा कालिया बावजी के जयकारों के साथ भक्त दर्शन हेतु उमड़ पड़े, जिसमें ग्रामीण अंचलों से आए पुरुषों ने धोती-पछेवड़ी तो महिलाओं ने अबोटिया पहन भगवान की पूजा-अर्चना की. दोपहर में मंदिर के शिखर पर ध्वजा धारण करवाई जलघड़ी सूर्योदय अनुसार निर्धारित समय पर सुबह 7.20 पर जल अभिषेक (प्रक्षाल), 7.45 बजे दुग्ध अभिषेक, 8. 10 इत्र, केशर, पुष्प पूजा, 8.30 आरती के मनोरथ हुए . केशर पूजा का क्रम आरती के बाद से दोपहर 1.30 बजे तक चला. दोपहर 12 बजे मुख्य शिखर पर ध्वजा धारण करवाई गई. दोपहर की नियमित पूजा 2 बजे जल, दुग्ध अभिषेक के साथ हुई. दोपहर 2.50 पर केशर पूजा हुई. भगवान को शाम 5 बजे स्वर्ण निर्मित हीरों जड़ित मनोहारी श्रृंगार धारण करवाया गया.
मेले में सुरक्षा व्यवस्था:
ऋषभदेव थानाधिकारी भरत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि मेले में ऋषभदेव उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, देवस्थान सहायक आयुक्त सहित 30 कर्मचारियों की ड्यूटी रही . मंदिर परिसर में एक डॉक्टर व दो नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी एवं 1 एम्बुलेंस 24 घंटे तैनात रही. इसके अलावा सीएचसी पर चिकित्साकर्मी भी आपातकाल के लिए तैनात रहे. जिले के ग्रामीण एएसपी सहित डिप्टी ऋषभदेव, सराड़ा, सलूम्बर, झाड़ोल, दस थानाधिकारी खेरवाड़ा, पहाड़ा, बावलवाड़ा, सराड़ा, परसाद समेत 300 पुलिसकर्मी एवं 30 महिला कांस्टेबल, इसमें सादा वर्दी और ट्रैफिककर्मी तैनात किया गया . अस्थायी पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया . मेले व शोभायात्रा के दौरान कस्बे में लगे सीसी टीवी कैमरों से निगरानी व गतिविधियों पर नजर रखी गई . एईएन, जेईएन सहित स्टाफ 24 घंटे तैनात रहा . एहतियात के लिए भगवान की शोभायात्रा के साथ लाइनमैन भी मौजूद रहे .
इन्द्र ध्वज का रथः
इन्द्र ध्वज का रथ मेले में निकाली जाने वाला शोभायात्रा में सम्मिलित किया गया. इसे पगल्याजी परिसर मे पहुंचने से पहले ढलान पर छोड़ा जाता है जिसे ग्रामीण अंचल के लोग आने वाले वर्ष का अनुमान लगाते है इस वर्ष पूर्व दिशा की ओर गया, अच्छी वर्षा के संकेत दिये .
मेले में खरीदारी का आनंद लिया:
ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं के वागड़ी गीत गए . पाल बिलख के भक्तों द्वारा मंदिर एवं पगल्याजी परिसर में भजन-कीर्तन किए. श्रद्धालुओं द्वारा दान पुण्य किया. महिलाओं ने मेले में नया बस स्टैंड, धर्मशाला परिसर, पाटुना चौक, हॉस्पिटल रोड, पगल्याजी रोड पर सजी दुकानों से घरेलू सामान, साज सज्जा, एवं जरूरत के सामानों की जमकर खरीदारी की एवं गुरुकुल ग्राउंड में लगे झूले डॉलर चकरी,ब्रेक डांस, नाव,ट्रेन का आनंद लिया .