Thursday , 16 August 2018

जनजातीय समुदाय की घटती आबादी पर चिंता

रांची, 12 अगस्त (उदयपुर किरण). झारखंड में जनजातीय परामर्शदात्री परिषद की उप समिति ने राज्य में जनजातीय समुदाय की घटती आबादी पर चिंता जाहिर करते हुए कारणों की तह तक तक जाने और वजहों के आधार पर प्रशासनिक व सामाजिक आधार पर सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई.

राज्य के गुमला जिले के विकास भवन स्थित आकांक्षा सभागार में आज जनजातीय परामर्शदात्री परिषद की उप समिति की बैठक में झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा सहित उप समिति के सदस्य के रूप में विधायक ताला मरांडी गुमला विधायक शिवशंकर उरांव मांडर विधायक गंगोत्री कुजूर रतन तिर्की सहित स्थानीय जनजातीय समुदाय के बुद्धिजीवी तथा प्रतिनिधि उपस्थित हुए. बैठक में जनजातीय समुदाय की घटती आबादी के कारणों को तलाश के लिए बनी उपसमिति के सदस्यों ने कहा कि आदिवासियों की घटती जनसंख्या चिंतनीय है, इस पर जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है. जनजातीय समुदाय के विकास के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं संचालित हैं. उसका लाभ सही लोगों तक पहुंचाने के लिए कारगर कदम उठाना होगा. उप समिति ने 17 अगस्त को जिला स्तर पर निर्धारित जनजातीय परामर्शदात्री की बैठक में अधिक से अधिक जनजातीय समुदाय के बुद्धिजीवीयों की भागीदारी व सुझाव आमंत्रित सुनिचित करने का निदेश जिला प्रशासन को दिया.

ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा वर्ष 1951 से वर्ष 2011 तक के विभिन्न वषों में जनगणना आकंडा के अनुसार जिले में जनजातीय समुदाय की कुल आबादी कितनी थी उनका प्रतिशत क्या था इससे संबंधित आंकड़े स्पस्ट किया जाए. उन्होंने कहा आज यह भी देखने की जरूरत है कि आजादी के बाद कितने आदिवासियों जनजातियों का भूमि अधिग्रहण हुआ है. भूमि अधिग्रहण के बाद कितनी जनजाति आबादी प्रभावित हुई है. कहां-कहां विस्थापित हुए हैं. उपसमिति के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा आप लोगों के दिए गए सुझाव महत्वपूर्ण है. आपके सुझावों को सरकार के द्वारा गठित जनजातीय परामर्शदात्री समिति तक पहुंचाया जाएगा. उन्हें प्रभावी तरीके से रखा जाएगा. जिला के पदाधिकारियों को कहा यह देखना आवश्यक है कि जनगणना में किन कारणों से जनजातीय समुदाय लोगों की संख्या कम हुई है इसका अध्ययन कराया जाए. यह भी कहा 1971 के जनसंख्या के मुकाबले अब भी जनजातीय समुदाय की आबादी कम है.

बैठक में उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा आजादी के बाद गुमला में जनजातीय समुदाय की आबादी में कमी आई है, उसका एक महत्वपूर्ण कारण यहां के जनजाति समुदाय के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों अथवा महानगरों में पलायन कर जाते हैं, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है. जनगणना कर्मी व उसके एजेंसी के लोगों की लापरवाही भी आंकड़ा कम होने की प्रमुख वजह है. जनजातीय समुदायों की आबादी कम होने के अन्य कारणों में जन्म व मृत्यु दर दोनों की अधिकता, आदिवासी महिलाओं द्वारा गैर आदिवासियों के साथ ब्याह, मानव तस्करी कौशल विकास कार्यक्रम के तहत महानगरों में युवाओं स्थानांतरण आदि प्रमुख वजह है. साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में जन जागरुकता अभियान चलाने सहित स्वास्थ्य सुविधाओं का आभाव अशिक्षाए रोजगार के अवसरों का आभाव नशापान सामाजिक कुरीति कुपोषण उपचार रोजी रोजगार की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर करने की पहल प्रशासन व सरकार की तरफ से करने की मांग उठी. सरकारी मशीनरी प्रशासनिक उदासीनताए लापरवाही के मामले पर त्वरित कारवाई करने सम्बन्धी व्यवस्था करने की मांग जनतिनिधियों की गई. साथ ही जनजातीय समुदाय की संस्कृतिए भावना के अनूरूप उन्हें अवसरों की उपलब्धता कराने की वकालत की गई.

Report By Udaipur Kiran

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